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  • Pages: 135p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126720545
  •  
    यह उपन्यास ‘अर्थ’ के उस ‘चक्र’ को सम्बोधित है जो हमारे समय की नाभि में स्थित है और जिससे हमारे समाज का लगभग हर अंग परिचालित हो रहा है। यह उपन्यास इस (दुष्) चक्र को आईना दिखाते हुए उसके सामने मानव-अस्तित्व के उन मूल्यों को स्थापित करता है जो हर युग, और हर संकट को लाँघकर मनुष्य की झोली में विरासत की तरह बाकी रह जाते हैं। उपन्यास की कथा समकालीन सामाजिक जीवन के नैतिक स्खलन, शासन-तंत्र की अर्थ-केन्द्रित संवेदनहीनता, व्यवस्था और असामाजिक तत्त्वों की आपसी टकराहटों तथा कदम-कदम पर उपस्थित प्रलोभनों और बहकावों से होते हुए हमें एक रोमांचकारी अनुभव-जगत में ले जाती है; और कई कोणों से धन लिप्सा पर आधारित इस व्यवस्था के क्षरणशील कोनों-अँतरों को उजागर करती है। उपन्यास का नायक आकाश और जीवन के सामाजिक- नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए उसका संघर्ष बार-बार हमें एक भावनात्मक उद्वेलन प्रदान करते हैं; और अपनी निष्ठा के रूप में भविष्य के लिए एक आश्वस्तिकारी संदेश देते हैं सुधी पाठकों के लिए बार-बार पढ़ने योग्य एक संग्रहणीय औपन्यासिक कृति।

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    Sheela Jhunjhunwala

    जन्म: उत्तर प्रदेश के कानपुर में

    शिक्षा: स्कूली शिक्षा एस.एस. सेन बालिका विद्यालय में हुई। क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से बी.ए., डी.ए.वी. कॉलेज से एम.ए. (अर्थशास्त्र) एवं एल.टी. की उपाधि ली। हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से ‘साहित्य-रत्न’ एवं प्रयाग महिला विद्यापीठ से ‘विदुषी आनर्स’। कानपुर के ही म्यूनिसिपल गर्ल्स कॉलेज में एक वर्ष अर्थशास्त्र का अध्यापन।

    1960 से 1965 तक टाइम्स ऑफ इंडिया प्रकाशन समूह साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ के महिला पृष्ठों का सम्पादन। पत्रिका ‘अंगजा’ की सम्पादिका रहीं। तदुपरांत दिल्ली में हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की पत्रिका ‘कादम्बिनी’ में संयुक्त सम्पादक रहने के बाद दैनिक हिन्दुस्तान में संयुक्त सम्पादक तथा साप्ताहिक हिन्दुस्तान की प्रधान सम्पादक रहीं। अंग्रेजी में ‘मनी मैटर्स’ पत्रिका की कार्यकारी सम्पादक। अनेक नाटकों एवं फिल्मों में पटकथा लेखन।

    राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान परिषद् से अनेक कृतियाँ प्रकाशित। आत्मकथात्मक संस्मरण ‘कुछ कही-कुछ अनकही’ एवं ‘कोने वाला कमरा’ तथा ‘सिने सितारों के अनछुए प्रसंग’ विशेष चर्चित। बाल साहित्य में भी अनेक पुस्तकें प्रकाशित।

    सम्मान: ‘एक नया सूरज’ हिन्दी अकादमी द्वारा पुरस्कृत। मातुश्री पुरस्कार, लोहिया पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा ‘पं. अंबिका प्रसाद वाजपेयी पुरस्कार’, ‘राजस्थान रत्न एवं रोटरी रत्न पुरस्कार’। 1991 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से अलंकृत।

    सम्प्रति: टी.पी. झुनझुनवाला फाउंडेशन की कार्यकारी अक्ष्यक्ष, प्रियदर्शिनी की संस्थापक चेयरपर्सन एवं महिला मंगल, राजस्थान क्लब, राजस्थान रत्नाकर आदि अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से संबद्ध।

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