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Aiwan-E- Ghazal

Aiwan-E- Ghazal

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  • Pages: 304p
  • Year: 1999
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788171787241
  •  
    ‘ऐवाने ग़ज़ल’ की फ़िजा परम्परा से शायराना चली आई है, लेकिन वक्त, बदला, ज़मींदारी की पुख्ता ज़मीनें खिसकने लगीं, सबकी बराबरी के नारे हवा में गूँजने लगे तो ऐवाने ग़ज़ल के आख़िरी शायर वाहिद हुसैन के पास दिल की बातें करने के लिए रंगीन परों वाली एक नन्ही-सी चिड़िया ही बच गई जो रोज़ उनके बाग़ में उनके पास आकर बैठती। ख़त्म होने पर आमादा इस कहानी को नई रफ्तार बख़्शती है चाँद। बड़ी हवेली की नन्ही-मुन्नी खिलंदड़ी नवासी चाँद बड़ी होकर स्टेज पर पहुँचती है और एक असम्भव मुहब्बत में तपेदिक के हत्थे चढ़ जाती है। लेकिन जाते-जाते अपने पीछे छोड़ जाती है ग़ज़ल को। ग़ज़ल जिसने पैदा होने के बाद से प्यार और दुलार क्या होता है, नहीं जाना; बड़ी हुई तो जिन्दगी से उसने सिर्फ एक चीज माँगी-प्यार। जो आखिरकार उसे नहीं मिला और उसने अपना खाली आँचल क्रांति के ऊपर फैला दिया। और नक्सली माँ-बाप की जंगलों में जन्मी इकलौती औलाद क्रान्ति ने जेसे ऐवाने ग़ज़ल की पूरी परम्परा को ही उलटकर रख दिया। उसके कमरे में बम थे, जेब में पिस्तौल, हाथ में सिगरेट और चेहरे पर वह तेज जिसके सामने ऐवाने ग़ज़ल की दीवारों पर चस्पाँ तमाम हुस्नपरस्त शायर हक-दक रह गए। छोटी-छोटी तफसीलों से लबरेज एक बड़ी कहानी।

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    Zilani. Bano

    जन्म: 1936। जन्मस्थान: बदायूँ (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एम.ए. (उर्दू)।

    इनकी कहानियों और उपन्यासों से आज के समय के बदलते जीवन-मूल्यों और समाज में औरत की हैसियत का एहसास होता है। जीलानी बानो अपनी धरती और दुनिया को ही अपनी कहानियों का मज़मून बनाती हैं।

    हैदराबाद की तहज़ीबी ज़िन्दगी पर उनका पहला उर्दू उपन्यास ऐवान-ए-ग़ज़ल काफ़ी चर्चित हुआ। अब तक हिन्दी और गुजराती में इसका अनुवाद हो चुका है। नेशनल बुक ट्रस्ट की योजना इसे हिन्दुस्तान की चौदह भाषाओं में प्रकाशित करने की है। इनके एक अन्य उपन्यास का नाम है - बारिश-ए-संग। इसका हिन्दी अनुवाद पत्थरों की बारिश नाम से छपा। इसके अतिरिक्त नौ कहानी-संग्रह प्रकाशित।

    इनकी कई कहानियों का अनुवाद विभिन्न देशी और विदेशी भाषाओं में हो चुका है। इन्होंने रेडियो और

    टी.वी. के लिए कई नाटक लिखे।

    पुरस्कार: ग़ालिब एवार्ड (1978), सोवियत लैण्ड नेहरू एवार्ड (1985), महाराष्ट्र उर्दू एकेडमी एवार्ड (1988), हरियाणा उर्दू एकेडमी एवार्ड (1989), पाकिस्तान का नुकुश एवार्ड (1991)। इनके अतिरिक्त कई अन्य पुरस्कार।

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      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
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