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Ajney Aalochana Sanchayan

Ajney Aalochana Sanchayan

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  • Pages: 400p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126722686
  •  
    एक आलोचक के रूप में अज्ञेय की स्थापनाओं ने पिछली लगभग पूरी शताब्दी को आन्दोलित किया है। वे अपने समय के अधीत, पश्चिम-पूर्व के लेखन से सुपरिचित लेखकों में थे। उन्होंने विश्व-वैचारिकी को अपने अध्ययन और चिन्तन में ढाला था और उसे भारतीय समाज और साहित्य के परिप्रेक्ष्य में देखा-परखा था। वैश्विक लेखन से सघन रिश्ते के बावजूद उनके लेखे ‘आधुनिकता’ का अर्थ ‘परम्परा’ से मुँह मोड़ना नहीं था। वे यदि अपने चिन्तन की पुष्टि में विदेशी लेखकों को याद करते हैं तो जगह-ब-जगह संस्कृत कवियों और आचार्यों के मतों को भी उतने ही सम्मान से उद्धृत करते हैं। उनकी आलोचना वस्तुतः एक ‘सुविचारित वार्ता’ (थॉटफुल टॉक) है। राजसत्ता और लेखक, राजनीति और साहित्य, परम्परा और आधुनिकता जैसे तमाम मुद्दों पर हिन्दी में बहसें शुरू करने का श्रेय अज्ञेय को ही जाता है। उनकी आलोचना पश्चिम की आलोचना से तुलनीय तो है, मुखापेक्षी नहीं। उन्होंने आलोचना को तार्किक संगति दी और भाषा-संवेदना को नया परिप्रेक्ष्य। कितने ही नए शब्द, नए बिम्ब दिए। प्रतीक, काल और मिथक पर नव्य दृष्टि दी। अज्ञेय ने आलोचना और चिन्तन को साहित्य के समग्र स्वरूप के अन्वीक्षण के माध्यम के रूप में देखा है। वे आलोचक का एक बड़ा वृत्त बनाते हैं जिसके भीतर उनका कवि-आलोचक-चिन्तक सभ्यता, संस्कृति, सौन्दर्यबोध, भारतीयता, आधुनिकता, स्वातंत्रय, यथार्थ, रूढ़ि और मौलिकता, सम्प्रेषण और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ-साथ काल के निस्सीम व्योम की परिक्रमा करता है। अपनी अवधारणाओं में अविचल, सोच में साफ और निर्मल, विरोधों की आँधी में भी निष्कम्प दीये-सी प्रज्ज्वलित अज्ञेय की कवि-छवि जितनी बाँकी और अवेध्य है, उतनी ही सुन्दर वीथियाँ उनके गद्य के अनवगाहित संसार में दृष्टिगत होती हैं। अज्ञेय की आलोचना का स्वरूप क्लासिक है। वह उच्चादर्शों का अनुसरण करती है और जीवन व साहित्य को समग्रता और समन्विति में देखती है।

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    Om Nishchal

    समकालीन साहित्य के सान्निध्य में रहने वाले हिन्दी के सुपरिचित कवि-आलोचक ओम निश्चल का जन्म 15 दिसम्बर, 1958 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के हर्षपुर गाँव में हुआ। लखनऊ एवं अवध विश्वविद्यालय से संस्कृत व हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधियाँ तथा पी-एच.डी.। भारतीय विद्याभवन, मुम्बई से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा। शुरुआती दिनों में वे सूचना विभाग, लखनऊ की पत्रिका ‘उत्तर प्रदेश’ के सम्पादन कार्यों से सम्बद्ध रहे, तदुपरान्त, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय में कोश कार्य। इन दिनों इलाहाबाद बैंक में वरिष्ठ प्रबन्धक (राजभाषा)।

    प्रकाशित कृतियाँ: शब्द सक्रिय हैं (कविता संग्रह), द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी: सृजन एवं मूल्यांकन, साठोत्तरी कविता में विचार-तत्त्व, कविता का स्थापत्य, कविता की अष्टाध्यायी, भाषा में बह आई फूलमालाएँ: युवा कविता के कुछ रूपाकार (आलोचना)।

    सम्पादन: द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी रचनावली, अधुनांतिक बांग्ला कविता, विश्वनाथप्रसाद तिवारी: साहित्य का स्वाधीन विवेक, अज्ञेय आलोचना संचयन व ‘जियो उस प्यार में जो मैंने तुम्हें दिया है’: अज्ञेय की प्रेम कविताएँ।

    भाषा विषयक पुस्तकें: बैंकिंग वाङ्मय (पाँच खंडों में): बैंकिंग शब्दावली, बैंकिंग हिन्दी पत्राचार: स्वरूप एवं सम्प्रेषण, बैंकों में हिन्दी प्रशिक्षण: प्रबन्ध एवं पाठ्यक्रम, बैंकिंग अनुवाद: प्रविधि और प्रक्रिया, बैंकिंग टिप्पण एवं आलेखन, व्यावसायिक हिन्दी एवं तत्सम शब्दकोश (सम्पादकीय सहयोग)।

    सम्पर्क: जी-1/506 ए, उत्तम नगर, नई दिल्ली-110059

    e-mail % omnishchal@gmail.com

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