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Aakhiri Kalaam

Aakhiri Kalaam

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  • Pages: 435p
  • Year: 2018, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126706693
  •  
    यह कथा-कृति उपन्यास की सारी सीमाओं और लालचों की उलट-पुलट देती है । चरित्रों के टकराव से कथा का विकास-यह जो उपन्यास-लेखन की आदत बन चुकी है, यहॉ इस आदत से लगभग इनकार है । फिर भी यह कथा-कृति एक उपन्यास ही है । इसमें गद्य और वृत्तान्त का एक अजब संयोजन है, जहाँ से ढाँचागत वर्जनाएँ समाप्त होती हैं और कथा का विस्तार और खुलापन बातों और विचारों को आमंत्रित करते-से लगते हैं । गद्य और गल्प का एक नया रसायन तैयार होता है जो अपने रस और सुर से अदभुत पठनीयता पैदा करता है । इस तरह यह उपन्यास गल्प की एक नई, अबाध निरन्तरता का प्रमाण है । इस उपन्यास में मिथकीय संस्कृति के विश्लेषण की एक पवित्र और निहत्थी छटपटाहट है । मिथक को इतिहास में बदलने की कोशिशों का पर्दाफाश है; विचार, संरचना और संस्कृति पर एकल बहसों का निर्वेद है । इसी के भीतर कहानी के तार बिखरे पड़े हैं । इन्हीं तकलीफों के भीतर से इतिहास के उन सूत्रों को ढूँढने का प्रयत्न है, जो एक मिले-जुले समाज की बुनियाद हैं और जिनको उलट-पुलट देने की बर्बर आहटें इधर चौतरफा सुनाई दे रही हैं । इसी तरह यह उपन्यास अपने समय के संसार की एक चित्र-रचना बनता है । अपने अतीत, इतिहास, मिथक और साहित्य-संस्कृति को उकेरता-उधेड़ता हुआ उसकी एक विस्फोटक और स्तब्धकारी पुनर्रचना सामने रखता है । उन बातों, अर्थों और व्याख्याओं को सामने लाता है, जो उसी में छुपी थीं लेकिन लोग और समाज, संस्कृति और विचार के धनुर्धर उसकी ओर से अक्सर आखें मूँदे रहते हैं । अन्तत: यह उपन्यास हमारे अतीत और वर्तमान की एक नई ‘पोलेमिक्स' है । इंसाफ की इच्छा का एक दुखद-द्वंद्वात्मक संवाद है, जो अपने लोगो और अपनी जनता को ही सम्बोधित है ।

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    Doodhnath Singh

    दूधनाथ सिंह

    जन्म : 17 अक्टूबर, 1936, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे-से गाँव सोबंथा में !

    शिक्षा : एम्.ए. (हिंदी साहित्य), इलाहबाद विश्वविद्यालय !

    जीविका : कुछ दिनों (1960-62) तक कलकत्ता में अध्यापन ! फिर इलाहबाद विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग में ! अब सेवानिवृत !

    लेखन : सन 1960 के आसपास से !

    कृतियाँ : आखिरी कलाम, निष्कासन, नमो अन्धकार (उपन्यास); सपाट चहरे वाला आदमी, सुखांत, प्रेमकथा का अंत न कोई, माई का शोकगीत, धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे, तू फू (कहानी-संग्रह); कथा समग्र (सम्पूर्ण कहानियां); यम्गाथा (नाटक); अपनी शताब्दी के नाम, एक और भी आदमी है, युवा खुशबू (कविता-संग्रह); सुरंग से लौटते हुए (लम्बी कविता); निराला : आत्महंता आस्था (निराला की कविताओं पर एक सम्पूर्ण किताब); लौट आ, ओ धर! (संस्मरणात्मक मुक्त गद्य); कहा-सुनी (साक्षात्कार और आलोचना); महादेवी (महादेवी की सम्पूर्ण रचनाओं पर एक किताब) !

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