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Aaj Ke Aiene Mein Rashtravad

Aaj Ke Aiene Mein Rashtravad

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  • Pages: 192
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789387462441
  •  
    जब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और थोथी देशभक्ति के जुमले उछालकर जेएनयू को बदनाम किया जा रहा था, तब वहाँ छात्रों और अध्यापकों द्वारा राष्ट्रवाद को लेकर बहस शुरू की गई। खुले में होने वाली ये बहस राष्ट्रवाद पर कक्षाओं में तब्दील होती गई, जिनमें जेएनयू के प्राध्यापकों के अलावा अनेक रचनाकारों और जन-आन्दोलनकारियों ने राष्ट्रवाद पर व्याख्यान दिए। इन व्याख्यानों में राष्ट्रवाद के स्वरूप, इतिहास और समकालीन सन्दर्भों के साथ उसके खतरे भी बताए-समझाए गए। राष्ट्रवाद कोई निश्चित भौगोलिक अवधारणा नहीं है। कोई काल्पनिक समुदाय भी नहीं। यह आपसदारी की एक भावना है, एक अनुभूति जो हमें राष्ट्र के विभिन्न समुदायों और संस्कृतियों से जोड़ती है। भारत में राष्ट्रवाद स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान विकसित हुआ। इसके मूल में साम्राज्यवाद-विरोधी भावना थी। लेकिन इसके सामने धार्मिक राष्ट्रवाद के खतरे भी शुरू से थे। इसीलिए टैगोर समूचे विश्व में राष्ट्रवाद की आलोचना कर रहे थे तो गाँधी, अम्बेडकर और नेहरू धार्मिक राष्ट्रवाद को खारिज कर रहे थे। कहने का तात्पर्य यह कि राष्ट्रवाद सतत् विचारणीय मुद्दा है। कोई अंतिम अवधारणा नहीं। यह किताब राष्ट्रवाद के नाम पर प्रतिष्ठित की जा रही हिंसा और नफरत के मुकाबिल एक रचनात्मक प्रतिरोध है. इसमें जेएनयू में हुए तेरह व्याख्यानों को शामिल किया गया है। साथ ही योगेन्द्र यादव द्वारा पुणे और अनिल सद्गोपाल द्वारा भोपाल में दिए गए व्याख्यान भी इसमें शामिल हैं।

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    Ravikant

    रविकान्त
    जन्म : 25 जून, 1979
    जन्मस्थान : गाँव जगम्मनपुर, जि़ला-जालौन, बुन्देलखंड, (उत्तर प्रदेश)
    शिक्षा : जेएनयू से हिन्दी साहित्य में एम.ए., एम.फिल्., लखनऊ विश्वविद्यालय से पी-एच.डी.
    रचनात्मक सक्रियता : 'आलोचना और समाज', सम्पादित पुस्तक, 'आज़ादी और राष्ट्रवाद' पुस्तकों का संपादन, 'अदहन' पत्रिका का संपादन, प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अनेक लेख, शोधालेख एवं कविताएँ प्रकाशित।
    दूरदर्शन से कई साहित्यिक आयोजन प्रसारित,  समाचार चैनलों पर बहस में दलित चिन्तक और राजनीतिक विश्लेषक के रूप में नियमित सहभागिता, अंक विचार मंच, लखनऊ के माध्यम से साहित्यिक और सामाजिक उत्थान के कार्यक्रमों का नियमित संचालन, साहित्य अकादेमी के ग्रामालोक कार्यक्रम का संयोजन, संस्थापक अंक फाउंडेशन, लखनऊ।
    सम्प्रति : सहायक प्रोफेसर , हिन्दी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।

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