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Aadmi Swarg Mein

Aadmi Swarg Mein

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  • Pages: 144p
  • Year: 2015, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126726400
  •  
    यह धर्म-कर्म के बल पर अन्तत: स्वर्ग पहुँच गए आदमी की कथा है। वही धर्म-कर्म जिससे हम सब परिचित हैं, यानि अपने स्वार्थों की अमानवीय होने की हद तक हिफाजत करते हुए पूजा-पाठ का अटूट पालन; आदमी भी वही जिसे हमने अपनी 'सबसे प्राचीन सभ्यता' के काई-शैवाल को छानकर निकाला है, यानि अन्तर्तम से निहायत धर्मविरोधी एक 'धार्मिक' और ईश्वर-आस्था को भौतिक प्राप्तियों के लिए इस्तेमाल करनेवाला एक चालाक प्राणी। और स्वर्ग भी वही जिसकी कामना हिन्दू धर्म के चार पुरुषार्थों में गिनी जाती है। इस उपन्यास के बहाने विष्णु नागर ने स्वर्ग, मनुष्य और धर्म—इन तीनों की व्याख्या की है। साथ में उस समाज की भी जिसे हमने नरक के सतत भय, ईश्वर की सर्वव्यापी मौजूदगी और तैंतीस करोड़ देवताओं की निरन्तर निगहबानी के बावजूद सफलतापूर्वक रचा। एक स्वभक्षी समाज। उपन्यास के नायक गेंदमल जी स्वर्ग में भी उसी समाज को ढूँढने और बनाने की कोशिश करते हैं और भारतवर्ष की महान परम्पराओं की लाज रखते हुए बनाने में सफल भी होते हैं। यही नहीं, वहाँ के अधिपति का पद प्राप्त करते हैं। विष्णु नागर ने कवि के रूप में सामाजिक और मानवीय सरोकारों की जो सहज व्याप्ति संभव की है, वही उनकी व्यंग्य कथाओं भी अन्यतम विषेषता है। इस उपन्यास में उसे उन्होंने एक बड़े कैनवस पर साधा है। धर्म और ईष्वर, और इनकी सामाजिक राजनीति हमेषा विष्णु जी का प्रिय विषय रही है। इस उपन्यास में उन्होंने इसका पूरा पाठ पेष किया है।

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    Vishnu Nagar

    शिक्षा : बचपन और छात्र-जीवन शाजापुर (मध्य प्रदेश) में बीता। 1971 से दिल्ली में स्वतंत्र पत्रकारिता शुरू की। 'नवभारत टाइम्स’ में पहले मुम्बई और बाद में दिल्ली में विशेष संवाददाता सहित विभिन्न पदों पर 1974 से 1997 के आरम्भ तक रहे। इस बीच 1982 से 1984 तक जर्मन रेडियो 'डोयचे वैले’ में सम्पादक रहे। 1997 से 2002 तक 'हिन्दुस्तान’ (दैनिक) के विशेष संवाददाता। 2003 से 2008 तक हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप की पत्रिका 'कादम्बिनी’ के कार्यकारी सम्पादक रहे। कुछ समय तक दैनिक 'नई दुनिया’ से सम्बद्ध रहे।

    प्रकाशित कृतियाँ : कहानी-संग्रह—'आज का दिन’, 'आदमी की मुश्किल’, 'कुछ दूर’, 'ईश्वर की कहानियाँ’, 'आख्यान’, 'रात-दिन’ तथा 'बच्चा और गेंद’; उपन्यास—'आदमी स्वर्ग में’; निबन्ध—'हमें देखती आँखें’, 'आज और अभी’, 'यथार्थ की माया’, 'आदमी और उसका समाज’ तथा 'अपने समय के सवाल’; व्यंग्य संग्रह—'जीव-जन्तु पुराण’, 'घोड़ा और घास’, 'राष्ट्रीय नाक’, 'नई जनता आ चुकी है’ तथा 'देश-सेवा का धंधा’, 'भारत एक बाज़ार है’; कविता संग्रह—'मैं फिर कहता हूँ चिड़िया’, 'तालाब में डूबी छह लड़कियाँ’, 'संसार बदल जाएगा’, 'बच्चे, पिता और माँ’, 'कुछ चीजें कभी खोई नहीं’, 'हँसने की तरह रोना’।

    'सहमत’ के लिए धर्मनिरपेक्ष रचनाओं के तीन संकलनों तथा 'रघुवीर सहाय’ पुस्तक का सम्पादन असद ज़ैदी के साथ। सुदीप बॅनर्जी की प्रतिनिधि कविताओं के संकलन का सम्पादन लीलाधर मंडलोई के साथ। 'बोलता लिहाफ’ (श्रेष्ठ कथाकारों की कहानियों का संकलन) का सम्पादन मृणाल पाण्डे के साथ।

    इसके अलावा नवसाक्षरों के लिए कई पुस्तकें लिखीं तथा सम्पादित कीं।

    सम्मान : 'कथा’ संस्था का 'अखिल भारतीय कथा पुरस्कार’, हिन्दी अकादमी, दिल्ली का 'साहित्य सम्मान’, कविता के लिए 'शमशेर सम्मान’, मध्य प्रदेश सरकार का 'शिखर सम्मान’ तथा व्यंग्य के लिए 'व्यंग्य श्री’ सम्मान आदि।

    सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन।

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