• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

1857 : Awadh Ka Muktisangram

1857 : Awadh Ka Muktisangram

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 300

Special Price Rs. 270

10%

  • Pages: 164p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126712902
  • ISBN 13: 9788126712908
  •  
    यशस्वी पत्रकार और विद्वान लेखक अखिलेश मिश्र की यह पुस्तक एक लुटेरे साम्राज्यवादी शासन के खिलाफ अवध की जनता के मुक्ति युद्ध का दस्तावेज है। अवध ने विश्व की सबसे बड़ी ताकत ब्रिटेन का जैसा दृढ़ संकल्पित प्रतिरोध किया और इस प्रतिरोध को जितने लम्बे समय तक चलाया उसकी मिसाल भारत के किसी और हिस्से में नहीं मिलती। पुस्तक 1857 की क्रान्ति में अवध की सांझी विरासत - हिन्दू-मुस्लिम एकता को भी रेखांकित करती है। इस लड़ाई ने एक बार फिर इस बात को उजागर किया था कि हिन्दू-मुस्लिम एकता की बुनियादें बहुत गहरी हैं और उन्हें किसी भेदनीति से कमजोर नहीं किया जा सकता। आन्दोलन की अगुवाई कर रहे मौलवी अहमदुल्लाह शाह, बेगम हजरत महल, राजा जयलाल, राजा बेनीमाधव, राजा देवीबख्श सिंह में कौन हिन्दू था, कौन मुसलमान? वे सब एक आततायी साम्राज्यवादी ताकत से आजादी पाने के लिए लड़ने वाले सेनानी ही तो थे। इस मुक्ति संग्राम का चरित प्रगतिशील था। न केवल इस संग्राम में अवध ने एक स्त्री बेगम हजरत महल का नेतृत्व खुले मन से स्वीकार किया बल्कि हर वर्ग, वर्ण और धर्म की स्त्रियों ने इस क्रान्ति में अपनी-अपनी भूमिका पूरे उत्साह से निभाई चाहे वह रानी तुलसीपुर हों अथवा अभी कुछ वर्ष पूर्व तक अज्ञात वीरांगना के रूप में जानी जाने वाली योद्धा पासी अदा देवी। अवध के मुक्ति संग्राम की अग्रिम पंक्ति में भले ही राजा, जमींदार और मौलवी रहे हों लेकिन यह उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे किसानों और आम जनता का जुझारूपन था जिसने सात दिन के भीतर अवध में ब्रिटिश शासन को समाप्त कर दिया था। यह पुस्तक 1857 के जनसंग्राम के कुछ ऐसे ही उपेक्षित पक्षों को केन्द्र में लाती है। 2006 में 1857 के जनसंग्राम को याद करना सिर्फ इसलिए ही जरूरी नहीं है कि यह वर्ष उस महान क्रान्ति की 150वीं वर्षगाँठ का है बल्कि इसलिए भी कि इतिहास सिर्फ अतीत का लेखा-जोखा नहीं वह सबक भी सिखाता है। आज भूमंडलीकरण के इस दौर में जब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की लूट का जाल आम भारतीय को अपने फंदे में लगातार कसता जा रहा है, ईस्ट इंडिया कम्पनी से लोहा लेने वाला, उसे एक संक्षिप्त अवधि के लिए ही सही, पराजित करने वाले वर्ष 1857 से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Akhilesh Mishra

    जन्म: 22 अक्तूबर, 1922, सेमरौता, रायबरेली (उ.प्र.)।

    विश्वविद्यालय में अध्यापन के प्रस्तावों को ठुकराकर हिन्दी पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया क्योंकि ‘जनता के पहरुए कूकुर’ की भूमिका पसन्द थी। ‘अधिकार’ से पत्रकारिता आरम्भ कर वह ‘स्वतंत्र भारत’ (लखनऊ), दैनिक जागरण (गोरखपुर), स्वतंत्र चेतना (गोरखपुर), ‘स्वतंत्र मत’ (जबलपुर) आदि दैनिक समाचार-पत्रों के सम्पादक रहे।

    साक्षरता अभियान में उनका अमूल्य योगदान रहा।

    समय-समय पर उन्हें अनेक पुरस्कार-सम्मान दिए गए लेकिन उन्होंने कोई सम्मान स्वीकार नहीं किया।

    पुस्तकें: धर्म का मर्म (2003), पत्रकारिता: मिशन से मीडिया तक (2004) तथा पाँवों का सनीचर (2005) के अलावा साक्षरता अभियान के तहत लिखी गई कई पुस्तकें प्रकाशित हैं, इनमें कुछ हैं: मुकद्दर की मौत (1991), गाँव में जादूगर (1992), बन्द गोभी का नाच (1992), प्रधान का इलाज आदि। कुछ अनुवाद भी प्रकाशित जिनमें अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के मूलतत्त्व (मार्ग्रेट तथा हेराल्ड स्प्राउट कृत) तीन खंडों में (उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा प्रकाशित एवं सम्मानित), लालबहादुर शास्त्री (लेखक के. आर. मनकेकर, प्रकाशन विभाग, भारत सरकार), मार्क्स तथा आधुनिक सामाजिक सिद्धान्त (एलेन ¯स्वजवुड, 1974) उल्लेखनीय हैं।

    शोध-पत्र: ए फैलेसी फेस्ड (2002 में लखनऊ विश्वविद्यालय में जमा किया गया)।

    अन्तिम समय तक लेखन के साथ-साथ जनान्दोलनों में भी सक्रिय भागीदारी। मानवाधिकारों के लिए सतत् संघर्षशील रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में विज़िटिंग प्रोफेसर भी रहे।

    निधन: 22 नवम्बर, 2002 (लखनऊ)।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144