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Salaam

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  • Pages: 131p
  • Year: 2016, 4th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 817119897X
  • ISBN 13: 9788171198979
  •  
    ‘दलित लेखन दलित ही कर सकता है’ को पारंपरिक सोच के ही नहीं प्रगतिशील कहे जाने वाले आलोचकों ने भी संकीर्णता से लिया है ! दलित विमर्श साहित्य में व्याप्त छदम को उघाड़ रहा है ! साहित्य में जो भी अनुभव आते हैं वे सर्वभोमिक और शास्वत नहीं होते ! इन सन्दर्भों में ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानियां दलित जीवन की संवेदनशीलता और अनुभवों की कहानियां हैं, जो एक ऐसे यथार्थ से साक्षात्कार कराती हैं, जहाँ जहरों साल की पीड़ा अँधेरे कोनो में दुबकी पड़ी है ! वाल्मीकि के इस संग्रह की कहानियां दलितों के जीवन-संघर्ष और उनकी बेचैनी के जिवंत दस्तावेज हैं, दलित जीवन की व्यथा, छटपटाहत, सरोकार इन कहानियों में साफ़-साफ़ दिखायी पड़ती हैं ! ओमप्रकाश वाल्मीकि ने जहाँ साहित्य में वर्चस्व की सत्ता को चुनोती दी है, वहीँ दबे-कुचले, शोषित-पीड़ित जन समूह को मुखरता देकर उनके इर्द-गिर्द फैली विसंगतियों पर भी चोट की है ! जो दलित विमर्श को सार्थक और गुणात्मक बनाता है ! समकालीन हिंदी कहानी में दलित चेतना की दस्तक देने वाले कथाकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की ये कहानियां अपने आप में विशिष्ट हैं ! इन कहानियों में वास्तु जगत का आनद नहीं, दारूण दुःख भोगते मनुष्यों की बेचैनी है !

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    Om Prakash Valimiki

    जन्म: 30 जून, 1950, बरला, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश। शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी साहित्य)।

    प्रकाशित कृतियाँ: सदियों का संताप, बस्स! बहुत हो चुका, अब और नहीं (कविता संग्रह); जूठन (आत्मकथा) अंग्रेजी, जर्मन, स्वीडिश, पंजाबी, तमिल, मलयालम, कन्नड़, तेलगू में अनूदित एवं प्रकाशित। सलाम, घुसपैठिए (कहानी संग्रह), दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र, मुख्यधारा और दलित साहित्य, सफाई देवता (सामाजिक अध्ययन), दलित साहित्य: अनुभव, संघर्ष और यथार्थ, ।उउं ंदक वजीमत ैजवतपमे, चयनित कविताएँ।

    अनुवाद: सायरन का शहर (अरुण काले) कविता संग्रह का मराठी से हिन्दी में अनुवाद, मैं हिन्दू क्यों नहीं (कांचा एलैया) की अंग्रेजी पुस्तक का हिन्दी में अनुवाद, लोकनाथ यशवन्त की अनेक मराठी कविताओं का हिन्दी में अनुवाद।

    अन्य: 1. लगभग 60 नाटकांे में अभिनय एवं निर्देशन, 2. विभिन्न नाट्य दलों द्वारा ‘दो चेहरे’ का मंचन, 3. ‘जूठन’ के नाट्य रूपान्तरण का अनेक नगरों: जालन्धर, चंडीगढ़, लुधियाना, कैथल आदि में मंचन, 4. अनेक राष्ट्रीय सेमिनारों में हिस्सेदारी, 5. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में पुनश्चर्या पाठ्यक्रम में अनेक व्याख्यान, 6. अनेक विश्वविद्यालयों, पाठ्यक्रमों में रचनाएँ शामिल, 7. प्रथम हिन्दी दलित साहित्य सम्मेलन, 1993, नागपुर के अध्यक्ष, 8. 28वें अस्मितादर्श साहित्य सम्मेलन, 2008, चन्द्रपुर, महाराष्ट्र के अध्यक्ष, 9. भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला सोसाइटी के सदस्य।

    पुरस्कार/सम्मान: 1. डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार, 1993, 2. परिवेश सम्मान, 1995, 3. जयश्री सम्मान, 1996, 4. कथाक्रम सम्मान, 2001, 5. न्यू इंडिया बुक पुरस्कार, 2004, 6. साहित्य भूषण सम्मान 2006, 7. 8वाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन, 2007, न्यूयॉर्क, अमेरिका सम्मान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ।

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
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