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Ramayani

Ramayani

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  • Pages: 267p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126715459
  •  
    रामायनी: लक्षमन जी की सत परीच्छा भारत की सबसे विशाल जनजातियों में एक मध्य प्रदेश की गोंड जनजाति जिसने गोंडवाना राज्य के रूप में मध्य भारत के विशाल भूभाग पर अपना राज्य स्थापित किया, ने अपनी गाथात्मक इतिहास चेतना और रूप को सदियों से रामायनी, पंडुवानी और गोंडवानी के रूप में सुरक्षित रखा है। सदियों से परधान गायक गोंड यजमानों को अपने देवताओं और चरित नायकों की यश-गाथा गाकर सुनाते हैं, जो उनकी जीविका भी है। साथ ही उस स्मृति को सुरक्षित रखने और पीढ़ियों में हस्तांतरित करने की भूमिका भी, जो वाचिकता में कभी रची गई थी। यह वाचिकता में प्रवाहित जातीय स्मृति का गाथा इतिहास है। इस स्मृति से ही गोंड जनजाति की धार्मिक, आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक अस्मिता की पहचान स्थापित होती है। ‘रामायनी: लक्षमन जी की सत परीच्छा’ के इन गीतों के पात्र अवश्य तुलसीकृत रामायण पर आधारित हैं पर शेष सब कुछ आंचलिक है। रामायनी नाम से मूल रामायण के सम्पूर्ण घटना-प्रसंगों की ज्यों की त्यों अपेक्षा करना उचित नहीं है। यहाँ रामायण की मूल कथा को आंचलिक वातावरण के अनुकूल आदिवासी संस्कारों से बद्ध कर एक ऐसा नया रूप दे दिया गया है, जो आधार कथा से भिन्न होते हुए भी विशिष्ट है। उल्लेखनीय यह है कि इसमें लक्ष्मण जी का चरित्र प्रमुख रूप से उभरा है, जिस प्रकार पंडुवानी में भीम का। लक्ष्मण जी के चरित्र को विभिन्न प्रसंगों और घटनाओं के माध्यम से उभारा गया है। उनके ‘सत’ की बार-बार प्रशंसा की गई है। वे ही रामायनी के आदर्श चरित्र हैं। प्रस्तुत पुस्तक एक तरफ जहाँ मध्य भारत जैसे विस्तृत क्षेत्र के लोक गाथा गीतों का महत्त्वपूर्ण परिचय देती है वहीं भावी शोधकर्त्ताओं के लिए भी नए आयाम प्रस्तुत करती है।

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    Vijay Chourasiya

    डॉ. विजय चौरसिया

    जन्मस्थान: ग्राम बंड़ा जिला - कटनी (मध्य प्रदेश)।

    शिक्षा: बी-एस.सी., बी.ए.एम.एस., डी.एच.बी.।

    उपलब्धियाँ: 1. विगत तीस वर्षों से मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य की लोक कलाओं एवं लोक नृत्यों के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रयासरत, 2. मध्य प्रदेश तथा देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे कादम्बनी, धर्मयुग, हिन्दुस्तान टाइम्स, दिनमान, इंडिया टुडे, दैनिक भास्कर, नवभारत, नई दुनिया में एक हजार से अधिक लेखों का प्रकाशन, 3. मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में करीब 30 लोक नाट्य एवं लोक नर्तक दलों का नेतृत्व, 4. प्रकृति पुत्र बैगा तथा रामायनी लक्षमन जी की सत परिच्छा का मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, भोपाल द्वारा प्रकाशन, 5. मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध जनजाति गोंड में प्रचलित गोंड राजाओं के इतिहास का साक्ष्य बाना गीत पर आधारित ग्रन्थ आख्यान मध्य प्रदेश आदिवासी लोक कला अकादमी द्वारा प्रकाशित, 6. मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध समाजसेवी संस्था वीर सावरकर लोक कला परिषद में निर्देशक, 7. स्वराज संस्थान संचालनालय संस्कृति विभाग, भोपाल द्वारा स्वाधीनता फैलोशिप 2006-07 (आदिवासी लोक गीतों में सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना विषय पर प्रदान की गई), 8. मध्य प्रदेश के लोक नृत्य एवं लोक कलाओं का देश-विदेश में प्रदर्शन।

    सम्प्रति: चिकित्सा कार्य, पत्रकारिता, लोक संस्कृति पर लेखन, प्रदेश के लोक नृत्यों एवं लोक संस्कृति के संरक्षण हेतु प्रयासरत।

    सम्पर्क: चौरसिया सदन, गाड़ासरई, जिला डिंडोरी (मध्य प्रदेश)

    फोन: 07645-235270

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
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