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Nirman Purush Dr. Ambedkar Ki Samvidhan Yatra

Nirman Purush Dr. Ambedkar Ki Samvidhan Yatra

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Special Price Rs. 225

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  • Pages: 329
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352211968
  •  
    निर्माण पुरुष डॉ. अम्बेडकर की संविधान यात्रा आजादी के समय देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती भावी शासन-व्यवस्था में सामन्तवाद को प्रभावी होने से बचाना था। समाज में व्याप्त सामन्तवाद के खिलाफ लड़ते रहने वाले बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर द्वारा संविधान-निर्माण के दौरान इस चुनौती से किस तरह निपटा गया? इसका जवाब खोजने के साथ संविधान में ‘देश के नाम’, ‘राज्यक्षेत्र’, ‘मूल अधिकार’, ‘नीति-निर्देशक सिद्धान्त’ से सम्बन्धित अनुच्छेद १ से ५१ के प्रावधानों को अन्तिम रूप देने के लिए संविधान सभा मे हुए बहस को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है। बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की जीवनी में रूचि रखने वाले देशवासियों के समक्ष आजादी के आन्दोलन में डॉ. अंबेडकर की भूमिका को सन्देह के घेरे में करके तरह-तरह के सवाल किये जाते हैं, इस पुस्तक में इसका भी जवाब खोजने का प्रयास किया गया है। देश की गुलामी के लिए उत्तरदायी रही भारतीय समाज की सामन्तवादी प्रवृत्ति को समाप्त करने एवं देश को आन्तरिक गुलामी से मुक्त कराने में बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर द्वारा किये गये संघर्ष और उनके विचार का विश्लेषणात्मक अध्ययन इस पुस्तक के माध्यम से किया गया है। बिलकुल विपरीत परिस्थिति में भारत जैसे सांस्कृतिक विविधता वाले देश के लिए सर्वमान्य संविधान के निर्माण में डॉ. अम्बेडकर एवं अन्य संविधान निर्माताओं की भूमिका का भी विश्लेषणात्मक अध्ययन इस पुस्तक के माध्यम से किया गया है।

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    Anoop Baranwal

    अनूप बरनवाल का जन्म १५ जुलाई १९७३ को जिला आजमगढ़ (यू.पी.) के एक छोटे से कस्बा ठेकमॉ बाजार में हुआ। आपके पिता का नाम श्री मदन मोहन और माता जी का स्व. श्रीमती र्उिमला देवी है। आपने तिलकधारी महाविद्यालय, जौनपुर (पूर्वाञ्चल विश्वविद्याल) से बी. एस-सी. एवं कानून की पढ़ाई की और एल-एल. बी. परीक्षा में सर्वोच्च स्थान व गोल्ड मेडल प्राप्त किया। आप वर्ष १९९८ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत कर रहे है।

    वकालत के साथ आप एकेडमिक रुचि भी रखते रहे है। कानून की पुस्तक ‘प्रिन्सिपुल एण्ड प्रैक्टिस ऑफ रिट जुरिस्डिक्शन’ वर्ष २००४ में प्रकाशित हुई। आप विधिक पत्रिका ‘वायस आफ लॉ एण्ड जस्टिस’ के सम्पादन का दायित्व वर्ष २०१० से निभा रहे हैं। आपने संस्थागत सुधार के लिए भी समय-समय पर प्रयास किया। इस दिशा में संवैधानिक महत्त्व की कई जनहित याचिकायें दाखिल की, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ‘भारत के निर्वाचन आयोग में चयन प्रव्रिâया में सुधार’ और इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश राज्य के ‘लोकायुक्त’, ‘सी.बी.सी.आई.डी.’, ‘विजिलेन्स’, ‘उपलोकायुक्त’, जैसे महत्त्वपूर्ण संस्थाओं में सुधार के सम्बन्ध में जनहित याचिकायें प्रमुख हैं।

    आपके द्वारा ‘यूनिफार्म सिविल कोड’ विषय पर भी शोध-कार्य किया जा रहा है।

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

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