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‘पेचीदा बातों को सरल शब्दों में ढालना ही मेरे लेखन का उद्देश्य’—मालचंद तिवाड़ी

जयपुर : विगत माह भारतेंदु हरिश्चंद्र संस्थान और राजस्थान डेयरी फेडरेशन के संयुक्त तत्त्वावधान में जयपुर के सरस संकुल सभागार में ‘साहित्य संवाद-4’ के अन्तर्गत जाने- माने कथाकार मालचंद तिवाड़ी से प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री सीपी देवल की बातचीत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार हेतु भारद्वाज ने की।

प्रारम्भ में संस्थान के अध्यक्ष ने अतिथियों का स्वागत किया और संचालन किया चर्चित कथाकार चरण सिंह पथिक ने। डेयरी फेडरेशन के महाप्रबन्धक (जनसम्पर्क) विनोद गेरा ने मालचंद और देवल का स्मृति-चिन्ह भेंट कर और शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। बातचीत के दौरान कथाकार मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि दुनिया की सबसे पेचीदा बातों को सरल शब्दों में ढालना ही मेरे लेखन का उद्देश्य है। वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री सीपी देवल ने कहा कि लोक शैली राजस्थान के रचनाकारों की विशेषता है। मालचंद तिवाड़ी सरल और सहज शब्दों के धोरों में कथाएँ रचते हैं। सीपी देवल ने अनूठे अन्दाज़ में मालचंद तिवाड़ी की कहानियों के अलग-अलग रंग दिखाए और उन पर तिवाड़ी से सवाल पूछे। जैसे कहानी—‘रूमाल’ जिसमें लडक़ी विदा हो रही है। कोई आता है—‘रूमाल चाहिए’। एक लडक़ा रूमाल देता है। रूमाल वापस आ जाता है, लेकिन लडक़ा उसे कभी धोता नहीं, अक्षुण्ण रखता है, क्योंकि उसमें लडक़ी के आँसू हैं, उसका काजल है, उसकी खुशबू है...! एक कहानी है— ‘त्राण’ यानी शरण। एक लडक़ी को केवल दो चीज़ों से डर लगता है। एक चूहा और दूसरा कहानी में विलेन बने मारवाड़ी सेठ से, क्योंकि दोनों लिजलिजे हैं। वह एक से डर कर दूसरे की शरण में भागती है। सभी सवालों के जवाब में मालचंद कहते हैं कि कहानी में जो लिखा जाता है, वह ऐसा झूठ है जो सच लगता है और पाठक उस अनुभव को अपने अनुभव से जोड़ता है। यही कहानी की सफलता है। किसी भी अच्छी कहानी की सबसे बड़ी शर्त है—अच्छा गद्य। गद्य अच्छा होगा तो कहानी में सारी चीज़ें सध जाएँगी। सीपी देवल ने मालचंद की कहानियों के बहाने कहानी और गद्य विधा पर गम्भीर चर्चा कराई। मालचंद की पुस्तक ‘बोरूंदा डायरी : अप्रतिम बिज्जी का विदा-गीत’ के साथ ही विजयदान देथा उर्फ बिज्जी के रचना-कर्म और उनकी यादें भी छाया की तरह चर्चा में साथ चलती रहीं। इस चर्चा में जहाँ मालचंद तिवाड़ी का प्रतिभावान कहानीकार खुल कर सामने आया वहीं लोग सीपी देवल के शब्द-सामथ्र्य और उनके कहने के आकर्षक अन्दाज़ से रू-ब-रू हुए। मालचंद तिवाड़ी ने अपनी एक नई कहानी ‘कीचड़’ का पाठ भी किया। आयोजन के मद्देनज़र सुपरिचित कथाकार मनीषा कुलश्रेष्ठ ने अपना विचार व्यक्त किया कि ‘सरस साहित्य संवाद’ एक गम्भीर रचनात्मक स्वरूप लेता जा रहा है। कथाकार मालचंद तिवाड़ी जी से सीपी देवल जी का रचना-प्रक्रिया व रचनात्मक द्वंद्व को लेकर ऐसा सार्थक संवाद हुआ, जिसके बहाने समकालीन कहानी की अपनी परतें खुलीं, कहानी के तत्त्वों और गुणवत्ता पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में राजाराम भादू, दुर्गाप्रसाद अग्रवाल, कृष्ण वीर द्रोण, रमेश खत्री, राम कुमार सिंह, उमा, भाग चंद, संदीप मील, इरा टाक, सावित्री चौधरी, रजनी मोरवाल, स्मिता शुक्ला, हरीश करमचंदाणी, प्रेमचंद गांधी, राघवेन्द्र रावत, लोकेश कुमार सिंह साहिल, फारूक इंजीनियर, संपत सरल, फारूक आफरीदी, अनुराग वाजपेयी, गजेन्द्र रिझवानी, श्याम माथुर और गुलाब बत्रा आदि की भागीदारी रही। धन्यवादज्ञापन किया संस्थान के सचिव ओमेन्द्र ने।


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