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Muria Aur Unka Ghotul (Vol. -1)

Muria Aur Unka Ghotul (Vol. -1)

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  • Pages: 346p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126712977
  •  
    मुरिया और उनका घोटुल–1 के इस भाग में बस्तर के मुरिया आदिवासियों के जीवन से जुड़े उन सभी आयामों को रेखांकित किया गया है जिनसे अभी तक हम अनभिज्ञ थे । यहाँ घोटुल है जिसका उद्गम स्रोत है लिंगो पेन देवता । यह गाँव के बच्चों और युवाओं का निवास स्थान है । कबीले के हर अविवाहित लड़के और लड़की को इसका सदस्य बनना पड़ता है । घोटुल की सदस्यता मात्र मन–बहलाव का साधन नहीं है बल्कि /ाार्मिक आस्थाओं से जुड़ी एक सामाजिक परम्परा है । इस परम्परा को कड़े नियमों द्वारा नियन्त्रित किया जाता है । यहाँ लड़कों को चेलिक और लड़कियों को मुटियारी कहा जाता है । लड़कों का नेता सरदार है तो लड़कियों की नेता बैलोसा है । मुरिया जीवन के आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक पहलुओं का वर्णन करता हुआ घोटुल सिर्फ एक रात्रि क्लब है, दिन में इसके सदस्यों को खाने की व्यवस्था, खेती, शिकार, मछली पकड़ना, शहद एकत्रित करना व सागो ताड़ का रस तथा र्इंधन जुटाने में व्यस्त कर दिया जाता है । मुरिया जीवन को खोलती इस पुस्तक में मुरिया समुदाय के जीवन के हर पहलू, उनकी आजीविका, कबीले का संगठन, बचपन, युवावस्था, धर्म और उनके देवताओं का वर्णन विस्तार से प्रामाणिक ढंग से किया गया है ।

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    Veriar Elwin

    VeriarElwin

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

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