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Mitti Ki Sugandh

Mitti Ki Sugandh

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  • Pages: 194p
  • Year: 1999
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171194214
  •  
    इस संकलन की लगभग सभी कहानियाँ प्रवासी भारतीयों के जीवन-संघर्ष, अनुभव और ऊहापोह की कहानियाँ हैं; लेकिन भारत की मिट्‌टी की सुगंध हर कहानी में रची-बसी है, चाहे वह लत हो, तमाशा खत्म हो या काल-सुंदरी । घर का ठूँठ की चन्नी विभाजन, टूटन और बिखराव की पीड़ा के चलते तमाम सुख-सुविधाओं के बावजूद ठूँठ होकर रह जाती है । पराया देस का नायक रंग और नस्ल-भेद के दमघोंटू वातावरण में जी रहा है । अभिशप्त का नायक प्रवासी जीवन से तालमेल न बिठा पाने के संकट से ग्रस्त है तो सुबह की स्याही लंदन की स्याह और संकीर्ण मानसिकता का परिचय कराती है । पुराना घर नए वासी में पश्चिमी संस्कृति में अपनी पहचान के गुम हो जाने का दर्द है तो सर्द रात का सन्नाटा में अपनों से छले जाने की पीड़ा । आदमखोर उपभोक्ता- संस्कृति की स्वार्थाधता की परतें खोलती है तो फिर कभी सही.. भौतिक मूल्यों और मानव-मन की भटकन का विश्लेषण करती है । इस बार कहानी.., बुधवार की छुट्‌टी बेघर एक मुलाकात और चाँदनी भी प्रवासी मन की पीड़ाओं का सघन ब्यौरा देने वाली कहानियाँ है । अपने देश से बाहर रहते हुए अपने देश की मिट्‌टी से जुडने की ललक से भरे रचनाकारों की ये कहानियाँ निश्चय ही हिंदी के कथा-जगत् में अपना विशिष्ट स्थान रखती है ।

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    Usha Raje Saxena

    गोरखपुर उत्तर-प्रदेश में जन्मीं, विगत तीन दशक से इंग्लैंड में प्रवासी भारतीय के रूप में जीवनयापन करनेवाली, मूलतः कवयित्री, कथाकार उषा राजे सक्सेना सर्जनात्मक प्रतिभा-सम्पन्न एक ऐसी लेखिका हैं जिनके साहित्य में अपने देश, सभ्यता, संस्कृति तथा भाषा के प्रति गहरे और सच्चे राग के साथ प्रवासी जीवन के व्यापक अनुभवों और गहन सोच का मंथन मिलता है।

    हिन्दी के प्रचार-प्रसार से जुड़ीं उषा राजे सक्सेना का लेखन (हिन्दी-अंग्रेज़ी) पिछली सदी के सातवें दशक में साउथ लंदन के स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं एवं रेडियो प्रसारण के द्वारा प्रकाश में आया। तदनन्तर आपकी कविताएँ, कहानियाँ एवं लेख आदि भारत, अमेरिका एवं योरोप के प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में छपती रहीं। आपकी कई रचनाएँ विभिन्न भारतीय भाषाओं एवं अंग्रेज़ी में अनूदित हो चुकी हैं। कुछ रचनाएँ जापान के ओसाका विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम मंे भी सम्मिलित हैं।

    उषा राजे ब्रिटेन की एकमात्र हिन्दी की साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका ‘पुरवाई’ की सह-संपादिका तथा हिन्दी समिति यू.के. की उपाध्यक्षा हैं। पिछले तीन दशक आप ब्रिटेन के लंदन बॉरो ऑफ मर्टन की विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रही हैं। आपने बॉरो ऑफ मर्टन एजूकेशन अथॉरिटी के पाठ्यक्रम का हिन्दी अनुवाद भी किया।

    भारत की विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रवास में हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मानित। अभी हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उषा जी को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ में ‘हिन्दी विदेश प्रसार सम्मान’ से पुरस्कृत किया है।

    कुछ ही वर्षों पूर्व उषा जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (हरियाणा) ने शोधकार्य किया है।

    प्रमुख कृतियाँ:

    काव्य-संग्रह: विश्वास की रजत सीपियाँ, 1996; इंद्रधनुष की तलाश में, 1997; कहानी-संग्रह: प्रवास में, 2002।

    संपादन: मिट्टी की सुगंध, 1999 (ब्रिटेन के प्रवासी भारतवंशी लेखकों का प्रथम कहानी-संग्रह)।

    संपर्क: %54, Hill Road, Mitcham, Surrey, CR4 2HQ. U.K.; email. usharajesaxena@hotmail.com

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna
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    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

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