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Manavtawadi Vicharak M. N. Rai

Manavtawadi Vicharak M. N. Rai

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Special Price Rs. 225

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  • Pages: 214p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180312632
  •  
    मानवतावादी विचारक एम–एन– राय प्रस्तुत पुस्तक मानवतावादी विचारक एम–एन– राय विचारक मानवेन्द्रनाथ राय की जीवनी है, जिसमें उनके व्यक्तित्व–कृतित्व पर प्रकाश डाला गया है । भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास में श्री मानवेन्द्रनाथ राय के कार्य–कलाप वह मजबूत कड़ी है, जिससे प्रथम महायुद्ध के पूर्व और उसके बाद के क्रान्तिकारी आन्दोलन का जुड़ाव रहा है । श्री मानवेन्द्रनाथ राय का जीवन घटनापरक और विचारपरकµदोनों ही तरीका का रहा है । कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी होने के बाद समाजवादी–मार्क्सवादी विचार–जगत में अपने विवेक और बुद्धि से विशिष्ट स्थान प्राप्त कर लिया था और अन्त में उन्होंने ‘नव–मानववाद’ सिद्धांत का प्रतिपादन किया, जिसमें मार्क्सवाद–समाजवाद की वर्ग–सीमाओं को तोड़ करके सम्पूर्ण मानव–जाति के विकास के लिए सहज मानवीय समाज के द्रष्टा बन गए । श्री मानवेन्द्रनाथ राय ने साम्यवाद की परि/िा के आगे जाने पर जोर देते हुए कहा कि पूँजीवाद तथा शोषण आधारित सामाजिक व्यवस्था को समाप्त करना पूरी मानव जाति–समाज के हित मैं है, अत% केवल वर्ग संघर्ष और वर्ग चेतना के आ/ाार पर यदि सत्ता ग्रहण की गई तो सर्वहारा वर्ग की तानाशाही तो स्थापित हो सकती है, लेकिन शोषण मुक्त समाज स्थापित नहीं किया जा सकता । व्यक्ति और मानव मात्र की स्वतन्त्रता चाहे वह राजनीतिक स्वतन्त्रता हो अथवा आर्थिक या सामाजिक, उस सबके लिए यह आवश्यक है कि उसके अवसरों को बढ़ाया जाए । शोषणहीन समाज व्यवस्था में पँूजीवादी व्यवस्था की तुलना में व्यक्ति को पहले से अ/िाक विकास के अवसर मिलने चाहिए । आर्थिक समानता, स्वतंत्रता और भ्रातृत्वपूर्ण समाज व्यवस्था में सभी क्षेत्रों में व्यक्तिगत उन्नति का सभी को पूरा–पूरा अवसर मिलना चाहिए । इसी आ/ाार पर उन्होंने व्यक्तिगत स्वतन्त्रता पर अ/िाक जोर दिया ।

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    Chandroya Dikshit

    Chandroya Dikshit

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