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प्रबन्धन | Management

Showing 10 books of 53 books
Banyan Tree Books Lokbharti Prakashan Radhakrishna Prakashan Rajkamal Prakashan

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  1. Pachis Global Brand

    Pachis Global Brand

    Regular Price: Rs. 195

    Special Price Rs. 175

    10%

  2. Aarthik Samvridhi Aur Vikas

    Aarthik Samvridhi Aur Vikas

    Regular Price: Rs. 350

    Special Price Rs. 263

    25%

    प्रस्तुत पुस्तक ‘आर्थिक संवृद्धि और विकास; में विकास अर्थशास्त्र में हुए नवीन विचारों, धारणाओं और सिद्धांतों का समावेश किया गया है ! प्रायः सभी अध्यायों में महत्तपूर्ण विषय सामग्री सम्मिलित की गई है ! जटिल विषयों को सरल भाव में उदाहरणों और रेखाचित्रों द्वारा स्पष्ट किया गया है ! विश्व्यपिकरण के इस युग में राष्ट्र के आर्थिक, औद्योगित एवं व्यावसायिक वातावरण के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन हो रहें हैं ! इसके फलस्वरूप राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में जो एक नये आर्थिक परिवेश का निर्माण हो रहा है, उन्हें ध्यान में रखते हुए भारतीय आर्थिक नीति के विभिन्न पहलुओ का विश्लेषण सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक आधार पर प्रस्तुत किया है ! विश्वास हे प्रस्तुत पुस्तक अध्यापकों, शोद्कर्ताओं, विद्यार्थियों तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले परीक्षार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा कर पाने में सफल होगी !
  3. Vittiya Prabandhan

    Vittiya Prabandhan

    Regular Price: Rs. 500

    Special Price Rs. 375

    25%

  4. Beema Siddhant Evam Vyavhar

    Beema Siddhant Evam Vyavhar

    Regular Price: Rs. 695

    Special Price Rs. 521

    25%

  5. Beema Prabandhan Evam Prashashan

    Beema Prabandhan Evam Prashashan

    Regular Price: Rs. 195

    Special Price Rs. 146

    25%

  6. Beema Prabandhan Evam Prashashan

    Beema Prabandhan Evam Prashashan

    Regular Price: Rs. 650

    Special Price Rs. 488

    25%

  7. Vyavasayik Vitt

    Vyavasayik Vitt

    Regular Price: Rs. 700

    Special Price Rs. 525

    25%

  8. Bolna To Hai

    Bolna To Hai

    Regular Price: Rs. 195

    Special Price Rs. 146

    25%

    बोलना तो है यदि हमसे कहा जाए कि, बोलिए मत, चुप रहिए! तो हम कितनी देर तक चुप रह सकते हैं? और चुप होते ही हम पाएँगे कि हमारे अधिकांश काम भी ठप हो गए हैं। यानी, बोलना तो है ही। बोले बिना किसी का काम चलता नहीं। नींद के बाद बचे समय पर जरा गौर कीजिए, पाएँगे कि ज्यादातर वक्त (75 प्रतिशत से भी ज्यादा) हम, या तो, बोल रहे हैं या सुन रहे हैं। जरा सोचिए, कि जिस काम पर सबसे ज्यादा समय खर्च कर रहे हों यदि उसे बेहतर कर लें तो हमारे जीवन का अधिकांश भी बेहतर हो जाएगा। यानी, अपने बोलने और सुनने को बेहतर बनाना, जीवन को ठीक करने जैसा काम होगा, क्या नहीं? दरअसल, चार मौलिक विधाएँ हैंदृबोलना, सुनना, लिखना, पढ़ना। इनमें से लिखने-पढ़ने की तो हम औपचारिक शिक्षा पाते हैं, लेकिन बोलना-सुनना, आश्चर्यजनक रूप से, सिर्फ नकल और अनुकरण के हवाले हैं। बोलना-सुनना औपचारिक तरीके से सीखा और सुधारा जा सकता है, और इसी की पहली सीढ़ी है यह पुस्तक।
  9. Satya-Vrat Katha

    Satya-Vrat Katha

    Regular Price: Rs. 350

    Special Price Rs. 263

    25%

    सत्यव्रत कथा यह प्रबन्धन का युग है। हर क्षेत्र में हर बात में प्रबन्धन है। जीवन में सफलता अर्जित करने के जितने सूत्र हैं उनमें से एक प्रमुख है सत्य और सत्य का भी अपना प्रबन्धन होता है। वैसे तो श्रीसत्यनारायणव्रतकथा बहुत प्राचीन है लेकिन इसमें प्रबन्धन के जो सूत्र आए हैं वे बिलकुल नवीन हैं, आज के लिए उपयोगी हैं और हर क्षेत्र में सफलता को सुनिश्चित करते हैं। इस कथा में पाँच अध्याय हैं और प्रत्येक में प्रबन्धन के गूढ़ सूत्र हैं। पहले अध्याय में सेवा प्रबन्धन, दूसरे में सम्पत्ति प्रबन्धन, तीसरे में सन्तान प्रबन्धन, चौथे में संघर्ष प्रबन्धन और पाँचवें में संस्कार प्रबन्धन को देखा जा सकता है। हम देख रहे हैं कि वर्षों से अनेक परिवारों में, कई स्थानों पर श्रीसत्यनारायणव्रतकथा हो रही है। हमने ही इसको एक पारम्परिक, पारिवारिक और सामान्य-सा धार्मिक आयोजन बना दिया है। या तो हम स्वयं कथा करते हैं या किसी विद्वान् से करवाते हैं। पंडितजी आते हैं, संस्कृत या हिन्दी में कथा करते हैं। घर की महिलाएँ रसोईघर में प्रसाद बनाने में व्यस्त रहती हैं। बच्चे इस दिन जितना हो सके उपद्रव कर लेते हैं। यजमान या तो फोन सुनेंगे या कौन आया, कौन नहीं आया यह सब देखने में ही उनका समय बीत जाता है। कथा आरम्भ होती है, कथा समाप्त हो जाती है। हमने इसको एकत्र साधारण-सा आयोजन बना दिया है। यह कथा ऐसी सामान्य कथा नहीं है। इस कथा के पीछे भाव यह है कि जीवन में ‘सत्य’ उतरे। इस कथा में दो प्रमुख विषय हैं। एक है संकल्प की विस्मृति और दूसरा है प्रसाद का अपमान। संकल्प की विस्मृति और प्रसाद का अपमान ये दो थीम हैं, जिनके आसपास यह कथा चलती है। संकल्प, जीवन में सत्य उतारने का। इसका प्रसाद क्या है? क्या पंजीरी या शुद्ध घी में बना हुआ हलवा...? वास्तव में श्रीसत्यनारायणव्रतकथा का प्रसाद है ‘सत्य’। तो जीवन में जो भी सत्य को विस्मृत करेगा, जब-जब भी उसको भूल जाएगा, तब-तब परेशानी में पड़ेगा। जीवन में जब-जब भी हम सत्य के प्रसाद का अपमान करेंगे यानी सत्य का अपमान करेंगे, तब-तब हम अपने-आप को संकट में पाएँगे। इस कथा में जो प्रसंग आए हैं यदि उनके भाव को ठीक से समझा जाए तो स्पष्ट सन्देश निकलकर आता है कि यह सत्य के अन्वेषण की कथा है। इसमें विशेषता है कि सत्य के साथ नारायण जोड़े गए हैं। सत्य को नारायण का, भगवान् का टेका, सहारा, आधार और बल दिया गया है।
  10. Shunya Se Shikhar

    Shunya Se Shikhar

    Regular Price: Rs. 295

    Special Price Rs. 221

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  53. शब्द-कोश | Dictionary
  54. शब्दों का उजियारा [ दिवाली पर 35% की महाछूट ]
  55. शायरी | Shayari
  56. शिक्षा | Education
  57. संगीत | Music
  58. संचयन | Sanchayan
  59. संचार मीडिया | Communication and Media Studies
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  63. समाजशास्त्र | Sociology
  64. सम्पूर्ण रचनाएँ | Collected Works
  65. साक्षात्कार | Interview
  66. सिनेमा | Cinema
  67. सूचना का अधिकार | Information Studies
  68. स्त्री-विमर्श | Women Studies
  69. स्वास्थ्य | Health and Fitness
  • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
  • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
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  • Korak An Imprint of Radhakrishna
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