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Main Janak Nandini

Main Janak Nandini

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  • Pages: 319
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126730216
  •  
    भारतीय मानस का अर्थ केवल पढ़े-लिखे शिक्षितों का मानस नहीं है, उसका मूल अभिप्राय है—लोक मानस। इस लोक मानस की भारतीयता का लक्षण है—काल के आदिहीन, अन्तहीन प्रवाह की भावना...! जनमानस में आज तक सीता का मूक, (मौन) स्वरूप ही विद्यमान है। सौम्यस्वरूपा आज्ञाकारी पुत्री का, जो बिना तर्क-वितर्क या प्रतिरोध किए पिता का प्रण पूर्ण करने हेतु या पुत्री धर्म के निर्वाह हेतु उस किसी भी पुरुष के गले में वरमाला डाल देती, जो शिव के विशाल पिनाक पर प्रत्यंचा का संधान कर देता। उस समर्पिता, सहधर्मिणी या सह-गामिनी पत्नी का जो सहजभाव से सारा राज्य सुख तथा वैभव त्यागकर पति राम की अनुगामिनी बनकर उनके संग चल देती है चुनौती-भरे वन्य जीवन के दुखों को अपनाने। सीता के चरित पर अनेक ग्रन्थ लिखे गए हैं, अधिकांश में उन्हें जगजननी, शक्तिस्वरूपा या देवी मानकर पूजनीया बनाया गया। किन्तु मानवी मानकर उनके मर्म के अन्तस्थल तक पहुँचने...उनके मर्म की थाह लेने की चेष्टा न के बराबर की गई। उनके प्रति किए गए राम के सारे निर्णय को उनकी मौन स्वीकृति मानकर राम की महानता, मर्यादा तथा उत्तमता को और महिमामंडित किया गया। क्या वास्तव में ऐसा था? क्या सीता के पास अपने प्रति किए जा रहे अविचार के प्रति प्रतिरोध के स्वर का अभाव था? अपने जीवन-जनित अभीष्ट अपने कर्मों में निहित कर जीती सीता क्या मात्र पाषाण प्रतिमा थीं? क्या उनका अन्तस संवेदनशून्य था या उन्हें हर्ष-विषाद तथा शोक सन्ताप नहीं व्याप्तता था? और क्या हर स्थिति-परिस्थिति को उन्होंने सहज स्वीकार लिया था, शिरोधार्य कर लिया था बिना प्रतिवाद किए? यह उपन्यास ऐसे ही अनेक प्रश्नों का सन्धान है।

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    Aasha Prabhat

    आशा प्रभात
    जन्म : 21 जुलाई, 1958
    शिक्षा : स्नातक।
    हिंदी में प्रकाशित कृतियाँ : दरीचे (काव्य-संग्रह); धुंध में उगा पेड़, जाने कितने मोड़, मैं और वह (उपन्यास);  कैसा सच (कथा-संग्रह)।
    उर्दू में प्रकाशित कृतियाँ : धुंध में उगा पेड़, जाने कितने मोड़ (उपन्यास)। मरमूज (शेरी मजमूआ); वह दिन (अफसानवी मजमूआ)।
    लिप्यंतरण एवं संपादन : साहिर समग्र (साहिर लुधियानवी का रचना-संसार)।
    सम्मान : बिहार राष्ट्र भाषा परिषद् द्वारा 'साहित्य सेवा सम्मानÓ। बिहार उर्दू अकादमी द्वारा 'सुहैल अजीमावादी अवार्डÓ और 'खसूसरी अवार्डÓ। 'प्रेमचंद सम्मानÓ, 'दिनकर सम्मानÓ, 'उर्दू दोस्त सम्मानÓ आदि।
    संप्रति : स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता।
    संपर्क : कोट बाजार, सीतामढ़ी-843 302
    ashaprabhat77@gmail.com

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