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प्रकृति | Nature

Showing 8 books of 8 books
Banyan Tree Books Lokbharti Prakashan Radhakrishna Prakashan Rajkamal Prakashan

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  1. Jungle Ki Jadi Butiyan

    Jungle Ki Jadi Butiyan

    Regular Price: Rs. 225

    Special Price Rs. 169

    25%

    जंगल की जड़ी-बूटियां वैज्ञानिक उपलब्धियों ने जीवन को जहां सहज व सुलभ बनाया है, वहीं प्रकृति से की गई छेड़-छाड़ के कारण पर्यावरण दूषित हुआ है। असाध्य रोगों के पीछे मुख्य कारक प्रदूषण भी रहा है। स्वस्थ रहने के लिए प्रकृति हमें असंख्य फल, फूल, सब्जश्ी, अनाज, जड़ी-बूटी उपलब्ध कराती है। प्रस्तुत पुस्तक प्रकृति से न सिर्फ़ हमारा तादात्म्य बनाती है वरन् उन जड़ी-बूटियों से भी परिचय कराती है, जिनके दैनिक इस्तेमाल से हम कई बीमारियों से स्वयं को बचा सकते हैं। एरण्ड, पुनर्नवा, कतीरा हिन्दी, फनियर बूटी, कपूर तुलसी, बन काकड़ू, गोखरू, भांग, जवा पिप्पली, लता करंज, दण्डी दरिया, विधारा, निर्गुण्डी कन्द, सत्यानाशी, न्याजश्बो, सफ़ेद सत्यानाशी, पिण्डालु, सर्पगन्धा तथा पिप्पली आदि लगभग 19 वनस्पतियों का चित्रों व रेखाचित्रों सहित वर्णन पुस्तक को सुग्राह्य बनाता है। इन मानव उपयोगी वनस्पतियों के विविध भाषाओं में नाम, उनकी पहचान, उनका प्राप्ति-स्थान, उनकी कृषि, रासायनिक संघटन, घरेलू दवा-दारू में उपयोग तथा औद्योगिक उपयोग आदि दिए हैं। जड़ी-बूटियों में रुचि रखनेवालों, आयुर्वेद व यूनानी के अध्येताओं, अनुसन्धानकर्त्ताओं, वन-अधिकारियों व वन- कर्मियों, फ़ार्मेसियों, कच्ची जड़ी-बूटियों के व्यापारियों के लिए पुस्तक बेशक उपयोगी और संग्रहणीय है।
  2. Adamkhoron Ke Beech

    Adamkhoron Ke Beech

    Regular Price: Rs. 195

    Special Price Rs. 146

    25%

    आदमख़ोरों के बीच भारत में हर साल बड़ी संख्या में निर्दोष लोग आदमख़ोर शेरों और तेंदुओं के शिकार होते हैं। इन मांसाहारी पशुओं का स्वाभाविक आहार वन्य प्राणी हैं तो फिर ये इन्सानों को क्यों खाने लगते हैं ? क्या इन बेगुनाह लोगों के जीवन की रक्षा की जा सकती है ? आदमख़ोरों के बीच में लोमहर्षक शिकार-कथाओं के साथ-साथ इन प्रश्नों के जवाब देने की कोशिश भी की गई है। लेखक प्रभावित इलाक़ों में रहे हैं तथा इस विषय का बारीकी से अध्ययन किया है। देश के बँटवारे के बाद अधिकांश जगहों पर जंगलों का सफ़ाया कर दिया गया। अब वहाँ जिधर नजश्र दौड़ाएँ बस गन्ने के खेत नजश्र आते हैं जिनमें आदमख़ोरों ने डेरा डाला हुआ है। ये खेत इनके क़िले बने हुए हैं। एक चालाक आदमख़ोर शेरनी का शिकार करने की मुहिम के सिलसिले में लेखक को इन्हीं खेतों के बीच फूस के छप्पर के नीचे मौत के साए में सोना पड़ा। लेखक ने उन लोगों की करुण दास्तान सुनी जिनके प्रियजन आदमख़ोरों का शिकार बन चुके थे। उन्हें ऐसे साहसी लोग भी मिले जो मौत के मुँह से बच निकले थे। शेर-तेंदुए के हमलों का कारण कुछ हद तक स्वयं मनुष्य भी है। लेखक का मानना है कि लोगों को वन, वन्य प्राणियों, ख़ासकर शेर, तेंदुए तथा अन्य हिंसक जानवरों की आदतों, उनके रहन-सहन और उनकी जीवन-पद्धति के बारे में सही जानकारी देने से ये खतरे टल सकते हैं, और जिन्दगी के खाते में दर्ज की जाने वाली मृत्यु-संख्याएँ कम हो सकती हैं।
  3. Jungle Ki Baten

    Jungle Ki Baten

    Regular Price: Rs. 250

    Special Price Rs. 225

    10%

    जंगल के जीव-जन्तुओं की छियासठ घटनाओं का इन कहानियों में वर्णन है । इन्सान के समान ये जीव संवेदनशील होते हैं । सुख-दुख की अनुभूति, ममता, स्नेह, अनुराग, वात्सल्य जैसी कोमल भावनाएँ इनमें इन्सान के समान ही देखी जाती हैं । इनमें जीवनसंगिनी और भाई-बहनों का रिश्ता सुखमय होता है । अपने-पराए में भेदभाव के बिना मौसियाँ एक दूसरे के बच्चों को अपना स्तनपान कराके पाल लेती हैं । बीमार, असहाय की जीवन-रक्षा के लिए भाई-बन्धु शिकार मारकर उसे खिलाते हैं । संकट में फँसे साथी की और सन्तान की जी-जान से रक्षा करते हैं । प्रिय के वियोग में या उसके मर जाने पर शोकाकुल साथी खाना छोडू देते हैं और प्राण त्याग देते हैं 1 कुदरत के ओपन एअर थिएटर में नीले आसमान को चूमते हुए पहाड़ों और गहरी नदियों में अविराम बहती चंचल सरिताओं के बैकड्रॉप में गूँजते हुए दिलकश संगीत के साथ प्यार-मुहब्बत, प्रेयसी के लिए जानलेवा युद्ध, आहार जुटाने के लिए कड़ा संघर्ष करनेवाले जीवों की इन मर्मस्पर्शी कहानियों में शेर, सिंह, लकड़बग्घा, गीदड़ जैसे मांसाहारियों; हाथी, गेटे, चीतल, सांभर, जैसे शाकाहारियों; जलचरों, सरीसृपों; मोर, कबूतर जैसे शान्तिप्रिय पक्षियों ने सशक्त किरदार निभाए हैं ।
  4. Jungle Ke Upyogi Variksh

    Jungle Ke Upyogi Variksh

    Regular Price: Rs. 250

    Special Price Rs. 225

    10%

    इस पुस्तक में मानव उपयोगी सात वृक्षों का वर्णन किया गया है । उनके विविध भाषाओं में नाम, उनकी पहचान, उनका प्राप्ति-स्थान, उनकी कृषि, रासायनिक संघटन, घरेलू तथा दवा-दारु में उपयोग, उनके औद्योगिक उपयोग आदि की विस्तृत जानकारी दी गई है । इन वृक्षों का स्वरूप बताने के लिए 24 रेखाचित्र 5 फोटो और 12 रंगीन फोटो दिए गए हैं । वृक्षों में रुचि रखनेवालों, आयुर्वेद व यूनानी के अध्येताओं, अनुसन्धानकर्ताओं, वन-अधिकारियों व वन-कर्मियों, फार्मेसियों, कच्ची जड़ी-बूटियों के व्यापारियों के लिए यह पुस्तक विशेष रूप से उपयोगी है । जिन वृक्षों का 'जंगल के उपयोगी वृक्ष' में वर्णन है वे ये हैं. गूलर, बकायन, त्रिफला, बरगद, नीम, बहेड़ा और पीपल ।
  5. Manav Upayogi Ped

    Manav Upayogi Ped

    Regular Price: Rs. 595

    Special Price Rs. 446

    25%

    मानव उपयोगी पेड़ जल, जंगल, जश्मीन निस्सन्देह मानव जीवन के आधार हैं। हमें शुद्ध वायु पेड़-पौधे ही उपलब्ध कराते हैं। लेकिन बढ़ते शहरीकरण के चलते पेड़-पौधों की उपेक्षा की गई और जंगल कटते चले गए जिसका ख़ामियाजश मनुष्य असाध्य बीमारियों से लड़ते हुए भर रहा है। रामेश बेदी प्रकृति के विशेषज्ञ लेखक हैं। यह पुस्तक विभिन्न पेड़ों की विभिन्न विशेषताओं से पाठक का परिचय कराती है। इसमें मानव उपयोगी 8 वृक्षों - अर्जुन, चालमुग्रा, खैर, तुवरक, गाइनोकार्डिआ, भिलावा, गोरख इमली तथा हरड़ का वर्णन किया गया है। पुस्तक में पेड़ों के विविध भाषाओं में नाम, उनकी पहचान, उनका प्राप्ति-स्थान, उनकी कृषि, रासायनिक संघटन, घरेलू दवा-दारू में उपयोग तथा औद्योगिक उपयोग आदि की जानकारी दी गई है। वृक्षों का स्वरूप बताने के लिए रेखाचित्रों तथा तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, जो पुस्तक को पठनीय बनाते हैं। पुस्तक न सिर्फ़ पेड़-पौधों में रुचि रखनेवालों, आयुर्वेद व यूनानी के अध्येताओं, अनुसन्धानकर्त्ताओं, वन- अधिकारियों व वन-कर्मियों, फ़ार्मेसियों, कच्ची जड़ी-बूटियों के व्यापारियों के लिए उपयोगी है वरन् आम जन के
  6. Natkhat Bandar

    Natkhat Bandar

    Regular Price: Rs. 225

    Special Price Rs. 169

    25%

    नटखट बंदर रामेश बेदी के अनुसार इंसान के सम्पर्क में सबसे अधिक मदारी बंदर आता है। मदारी की डुगडुगी पर नटखट बंदर को तमाशबीनों का मनोरंजन करते देखा जाता है। उधर आज़ाद विचरने वाले बंदर धरों, स्कूलों, दफ्श्तरों में ऊधम मचाने के लिए मशहूर हैं। बंदर की विभिन्न प्रजातियों को दिलचस्प और गहन जानकारी देने वाली इस पुस्तक में श्री बेदी ने प्रतिपादित किया है कि लंगूर का मुँह काला होता है और इसकी गाल में ताज़ा आहार जमा करने की थैली नहीं होती जैसी कि बंदर की गाल में होती है। श्रीराम का अनन्य भक्त होने से हनुमान के प्रति लोकमानस में अगाध श्रद्धा है। छोटे गाँव से लेकर महानगर तक सभी जगह स्थापित इसकी लाखों प्रतिमाओं को करोड़ों श्रद्धालु पूजते हैं। हनुमान चालीसा के पाठ से स्तवन करते हैं। यह भी कहा जाता है कि प्राणिमात्र के दुख-दर्दों को दूर कर उन्हें सुख की राह बताने के लिए भगवान बुद्ध अपने तीस पूर्वजन्मों में बंदर के रूप में पैदा हुए थे। पूँछ वाले और बिना पूँछ वाले बंदरों की जातियों का इस पुस्तक में सचित्र परिचय दिया है। 130 सादे चित्रों के अलावा और 15 रंगीन फोटो भी इसमें शामिल गए हैं। बिना पूँछ वाले बंदर - हुल्लक, ओरङ्-उतान, चिम्पांजी, गोरिल्ला - का दिलचस्प जीवन परिचय पुस्तक में दिया है।
  7. Gunkari Phal

    Gunkari Phal

    Regular Price: Rs. 650

    Special Price Rs. 488

    25%

    गुणकारी फल फल प्रकृति द्वारा इन्सान को दिए गए अनुपम वरदान हैं। ये कभी ताज़े, कभी पकाकर और कभी सुखाकर खाए जाते हैं। ये क्षुधा शान्त करते हैं, तृप्ति प्रदान करते हैं। मीठी सुगन्ध और उन्नत स्वाद वाले फल चित्त को आध्ादित करते हैं। स्वस्थ शरीर के संचालन के लिए जिन प्राकृतिक तत्त्वों की ज़रूरत है वे हमें फलों से मिलते रहते हैं। इनके द्वारा कैल्शियम, लोहा, ताम्र, फॉस्फ़ोरस आदि खनिज लवण, चिकनाई और विटामिनों की शरीर में आपूर्ति होती रहती है। फलों को रुग्णावस्था में पथ्य रूप में खिलाया जाता है। कुछ रोगों के निवारण के लिए फल- चिकित्सक मुख्य रूप से फलों का सेवन कराते हैं। पैंसठ फलों का 39 रंगीन तथा 103 सादे चित्रों के साथ इस पुस्तक में परिचय दिया गया है। उनका स्वरूप, प्राप्ति-स्थान, विविध भाषाओं में उनके नाम, उनकी खेती, उनका रासायनिक संघटन, उनके गुण और उनकी पौष्टिक उपादेयता का प्रतिपादन किया गया है। ताज़ा खाए जाने वाले लोकप्रिय फल इसमें सम्मिलित किए गए हैं। जैसे - आम, अमरूद, अंगूर, चीकू, नासपाती, केला, पपीता, लीची, सन्तरा, ख़रबूजा, तरबूज़ आदि; पहाड़ी इलाक़ों में पैदा होने वाले फल खुमानी, सेब, आड़ई, आलूबुखारा, बगूगोशा, चेरी, स्ट्रौबेरी, आदि; बाहर के देशों से भारत में संप्रविष्ट किए गए फल; जैसे - कीवी, एवाकाडो, दुरियन, राम्बुतान; सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स), जैसे - काजू, बादाम, अख़रोट, पिस्ता, चिलगोज़ा, किशमिश।
  8. Charaksamhita Ke Jiva-Jantu

    Charaksamhita Ke Jiva-Jantu

    Regular Price: Rs. 950

    Special Price Rs. 713

    25%

    चरकसंहिता के जीव-जन्तु चरकसंहिता व्यापक रूप से पढ़ा-पढ़ाया जाने वाला आयुर्वेद का प्रतिष्ठित ग्रन्थ है। महर्षि चरक ने इसमें अनेक प्रकार के मानव उपयोगी जीव-जन्तुओं का उल्लेख किया है। वनों, वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं के अन्वेषक, प्राणि-विशेषज्ञ रामेश बेदी ने अपनी दीर्घकालीन अनुभव के आधार पर उनकी प्रकृति और जातियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें निम्नलिखित वर्गों में श्रेणीबद्ध किया है: स्तनपायी की 44 जातियाँ पक्षियों की 42 जातियाँ सरीसृपों की 12 जातियाँ क्षुद्र जीवों की 12 जातियाँ कुल 110 जातियाँ इन जीव-जन्तुओं के सम्बन्ध में दिए गए 46 रंगीन फ़ोटो तथा 128 सादे चित्र इनके स्वरूप को भली भाँति समझने में सहायक होंगे। चरकसंहिता के जीव-जन्तुओं के स्वरूप, रहन-सहन, आहार-विहार, पारिवारिक जीवन, प्रजनन, सन्तान का पालन-पोषण, इन्सान के साथ उनका स्नेहल व्यवहार, इन्सान के लिए उनकी उपादेयता का लेखक ने विस्तार से परिचय दिया है। लेखक के अनुभव रोचक हैं। भाषा सरल, प्रवाहमयी और आकर्षक है। हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं साहित्यिक कृति सम्मान (2000-2001) प्राप्त।

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