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Kushal Prabandhan Ke Sootra

Kushal Prabandhan Ke Sootra

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  • Pages: 160p
  • Year: 2015, 2nd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183611428
  •  
    कुशल प्रबंधन के सूत्र कुशल प्रबंधन के सूत्र प्रबंधन पर सुरेश कांत के दैनिक ‘अमर उजाला कारोबार’ में हर मंगलवार को प्रकाशित होने वाले लोकप्रिय साप्ताहिक प्रबंधन-कॉलम में छपे लेखों में से 40 चुने हुए लेखों का संकलन है। इन लेखों में हिंदी में पहली बार प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर अत्यंत रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रकाश डाला गया है। स्व-प्रबंधन, कर्मचारी-प्रबंधन, कार्यालय-प्रबंधन, समय- प्रबंधन, व्यक्तित्व-विकास, औद्योगिक संबंध, नेतृत्व-कला, कौशल-विकास आदि सभी पक्षों पर इनमें इतने सरल, सुबोध और आकर्षक तरीके से चर्चा की गई है कि पाठक लेखक के साथ बह चलता है। प्रबंधन उसके लिए पराया अथवा दुरूह विषय नहीं रह जाता। प्रबंधन लेखक की नजर में व्यक्तित्व के सतत विकास और जीवन में निरंतर प्रगति की प्रक्रिया है। आदमी अपना ही परिष्कार न कर सके, अपने घर-परिवार की ही उन्नति न कर सके, तो वह कारोबार या दफ्तर की प्रगति कैसे सुनिश्चित कर सकेगा ? वह अपने को ही न सँभाल सके, तो दूसरों को - कर्मचारियों, ग्राहकों आदि को - क्या सँभाल सकेगा ? अच्छा आदमी ही अच्छा कर्मचारी, अधिकारी या प्रबंधक हो सकता है। अतः प्रबंधन छात्रों, शोधार्थियों, कारोबारियों, कर्मचारियों-अधिकारियों अथवा प्रबंधकों से ही ताल्लुक नहीं रखता, आम आदमी से भी ताल्लुक रखता है। वह कंपनी-जगत के ही मतलब की चीज नहीं, मनुष्य मात्र के मतलब की चीज है। वह आदमी को बेहतर आदमी बनाने की कला है। सुरेश कांत ने अपना लक्ष्य-समूह कॉरपोरेट-दुनिया के आदमी को ही नहीं, पूरी दुनिया के हर आदमी को मानकर इस विषय की प्रस्तुति की है। एक सफल, सिद्धहस्त रचनाकार होने के कारण वे इस विषय में लालित्य भरने में कामयाब रहे हैं। अपने विशद अध्ययन, गहरे ज्ञान और असरदार लेखन-शैली के बल पर वह इस विषय को हिंदी में जन-जन में लोकप्रिय बनाने में सफल रहे हैं। आप चाहे कोई भी हों, इस पुस्तक को पढ़ने के बाद आप वही नहीं रह जाएँगे, जो आप इसे पढ़ने से पहले थे। यह ‘अमर उजाला कारोबार’ में सुरेश कांत के प्रबंधन-कॉलम के अनगिनत पाठकों का ही नहीं, हमारा भी दावा है। और फिर आप इसी विषय पर सुरेश कांत की इसी के साथ प्रकाशित दूसरी पुस्तक प्रबंधन के गुरुमंत्र पढ़े बिना भी नहीं रह पाएँगे।

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    Suresh Kant

    चर्चित हिंदी-लेखक सुरेश कांत ने प्रायः सभी विधाओं में अपनी 25 से भी अधिक कृतियों द्वारा हिंदी-साहित्य को एक नई ताजगी दी है। उनकी अनेक कृतियाँ साहित्य कला परिषद (दिल्ली), हिंदी अकादमी (दिल्ली), उ.प्र. हिंदी संस्थान (लखनऊ) आदि द्वारा पुरस्कृत की जा चुकी हैं। उनके नुक्कड़ व्यंग्य-नाटक ‘विदेशी आया’ के 100 से भी ज्यादा प्रदर्शन हो चुके हैं। दैनिक ‘अमर उजाला कारोबार’ में हर रविवार को प्रकाशित होने वाला उनका साप्ताहिक व्यंग्य-कॉलम ‘अर्थसत्य’ और हर मंगलवार को प्रकाशित होने वाला उनका साप्ताहिक प्रबंधन-कॉलम बहुत चर्चित हुए हैं। उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ इस प्रकार हैं:

    व्यंग्य: ब से बैंक (पुरस्कृत), अफसर गए विदेश (पुरस्कृत), पड़ोसियों का दर्द, बलिहारी गुरु (पुरस्कृत), अर्थसत्य।

    उपन्यास: धम्मं शरणम् (पुरस्कृत), युद्ध, जीनियस, नवाब साहब, कनीज।

    कहानी: उत्तराधिकारी, गिद्ध, क्या आप एस.पी. दीक्षित को जानते हैं ?

    नाटक: रजिया, प्रतिशोध, विदेशी आया, गवाही, कौन ?

    बाल-साहित्य: कुट्टी, रोटी कौन खाएगा, चलो चाँद पर घूमें, भाषण बाबू, भैंस का अंडा, विश्वप्रसिद्ध बाल कहानियाँ (पाँच भाग)।

    अन्य: प्रबंधन के गुरुमंत्र, कुशल प्रबंधन के सूत्र, बैंकों में हिंदी का प्रयोग, इन्साइक्लोपीडिक डिक्शनरी ऑफ बैंकिंग एंड रिलेटिड टर्म्स (शीघ्र प्रकाश्य) आदि।

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna
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