• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Kashi Ka Assi (E-Book)

Kashi Ka Assi (E-Book)

Availability: In stock

Available formats: Kashi Ka Assi

* Required Fields

Regular Price: Rs. 195

Special Price Rs. 98

50%

Availability: In stock

Regular Price: Rs. 195

Special Price Rs. 98

50%

  • Pages: 171
  • Year: 2016, 12th Ed.
  • Binding:  Digital Edition
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126711468E
  •  
    काशी का अस्सी कहानियों और संस्मरणों के चर्चित कथाकार काशीनाथ सिंह का नया उपन्यास है % काशी का अस्सी । जिन्दगी और जिन्दादिली से भरा एक अलग किस्म का उपन्यास । उपन्यास के परम्परित मान्य ढाँचों के आगे प्रश्नचिह्न । पिछले दस वर्षों से ‘अस्सी’ काशीनाथ की भी पहचान रहा है और बनारस की भी । जब इस उपन्यास के कुछ अंश ‘कथा रिपोर्ताज’ के नाम से पत्रिकाओं में छपे थे तो पाठकों और लेखकों में हलचल–सी हुई थी । छोटे शहरों और कस्बों में उन अंक विशेषों के लिए जैसे लूट–सी मची थी, फोटोस्टेट तक हुए थे, स्वयं पात्रों ने बावेला मचाए थे और मारपीट से लेकर कोर्ट–कचहरी की धमकियाँ तक दी थीं । अब वह मुकम्मल उपन्यास आपके सामने है जिसमें पाँच कथाएँ हैं और उन सभी कथाओं का केन्द्र भी अस्सी है । हर कथा में स्थान भी वही, पात्र भी वे हीµअपने असली और वास्तविक नामों के साथ, अपनी बोली–बानी और लहजों के साथ । हर राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दे पर इन पात्रों की बेमुरव्वत और लट्ठमार टिप्पणियाँ काशी की उस देशज और लोकपरंपरा की याद दिलाती हैं जिसके वारिस कबीर और भारतेन्दु थे ! उपन्यास की भाषा उसकी जान हैµभदेसपन और व्यंग्य– विनोद में सराबोर । साहित्य की ‘मधुर मनोहर अतीव सुंदर’ वाणी शायद कहीं दिख जाय ! सब मिलाकर काशीनाथ की नज“र में ‘अस्सी’ पिछले दस वर्षों से भारतीय समाज में पक रही राजनीतिक–सांस्कृतिक खिचड़ी की पहचान के लिए चावल का एक दाना भर है, बस !

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Kashinath Singh

    जन्म : 1 जनवरी, 1937, बनारस जिले के जीयनपुर गाँव में ।

    शिक्षा : आरम्भिक शिक्षा गाँव के पास के विद्यालयों में। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. (‘59) और पी-एच.डी. (‘63)।

    काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 'हिन्दी भाषा का ऐतिहासिक व्याकरण’ कार्यालय में शोध-सहायक (‘62-‘64)। ’65 में वहीं के हिन्दी विभाग में प्राध्यापक, फिर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष पद से ‘97 में सेवा मुक्त।

    पहली कहानी 'संकट’ कृति पत्रिका (सितम्बर, 1960) में प्रकाशित।

    कृतियाँ : लोग बिस्तरों पर, सुबह का डर, आदमीनामा, नई तारीख, सदी का सबसे बड़ा आदमी, कल की फटेहाल कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, कहनी उपखान, (कहानी-संग्रह); घोआस (नाटक); हिन्दी में संयुक्त क्रियाएँ (शोध); आलोचना भी रचना है (समीक्षा); अपना मोर्चा, काशी का अस्सी, रेहन पर रग्घू, महुआचरित, उपसंहार (उपन्यास); याद हो कि न याद हो, आछे दिन पाछे गए (संस्मरण), गपोड़ी से गपशप (साक्षात्कार)।

    अपना मोर्चा का जापानी एवं कोरियाई भाषाओं में अनुवाद। जापानी में कहानियों का अनूदित संग्रह। कई कहानियों के भारतीय और अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद। उपन्यास और कहानियों की रंग-प्रस्तुतियाँ। 'तीसरी दुनिया’ के 'लेखकों-संस्कृतिकर्मियों के सम्मेलन’ के सिलसिले में जापान-यात्रा (नवम्बर, ‘81)

    सम्मान : कथा सम्मान, समुच्चय सम्मान, शरद जोशी सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, और 'रेहन पर रग्घू’ उपन्यास पर 2011 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार।

    सम्प्रति : बनारस में रहकर स्वतंत्र लेखन।

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144