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इतिहास | History

Showing 10 books of 106 books
Banyan Tree Books Lokbharti Prakashan Radhakrishna Prakashan Rajkamal Prakashan

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  1. Gandhi Ek Asambhav Sambhavna

    Gandhi Ek Asambhav Sambhavna

    Regular Price: Rs. 199

    Special Price Rs. 149

    25%

    गांधी: एक असम्भव सम्भावना साल-दर-साल दो बार गांधी को रस्मन याद कर बाक़ी वक़्त उन्हें भुलाये रखने के ऐसे आदी हो गए हैं हम कि उनके साथ हमारा विच्छेद कितना गहरा और पुराना है, इसकी सुध तक हमें नहीं है। एक छोटी-सी, पर बड़े मार्के की, बात भी हम भूले ही रहे हैं। वह यह कि पूरे 32 साल तक गांधी अँगरेज़ी राज के ख़िलाफ़ लड़ते रहे, पर अपने ही आज़ाद देश में वह केवल साढ़े पाँच महीने - 169 दिन - ज़िंदा रह पाए। इतना ही नहीं कि वह ज़िंदा रह न सके, हमने ऐसा कुछ किया कि 125 साल तक ज़िंदा रहने की इच्छा रखने वाले गांधी अपने आख़िरी दिनों में मौत की कामना करने लगे। अपनी एक ही वर्षगाँठ देखी उन्होंने आज़ाद हिंदुस्तान में। उस दिन शाम को प्रार्थना-सभा में बोलते हुए उन्होंने कहा: ‘‘मेरे लिए तो आज मातम मनाने का दिन है। मैं आज तक जिन्दा पड़ा हूं। इस पर मुझको खुद आश्चर्य होता है, शर्म लगती है, मैं वही शख्स हूं कि जिसकी जुबान से एक चीज निकलती थी कि ऐसा करो तो करोड़ों उसको मानते थे। पर आज तो मेरी कोई सुनता ही नहीं है। मैं कहूं कि तुम ऐसा करो, ‘नहीं, ऐसा नहीं करेंगे’ ऐसा कहते हैं।...ऐसी हालत में हिन्दुस्तान में मेरे लिए जगह कहां है और मैं उसमें जिन्दा रहकर क्या करूंगा? आज मेरे से 125 वर्ष की बात छूट गई है। 100 वर्ष की भी छूट गई है और 90 वर्ष की भी। आज मैं 79 वर्ष में तो पहुंच जाता हूं, लेकिन वह भी मुझको चुभता है।’’ क्या हुआ कि गांधी ऊपर उठा लिये जाने की प्रार्थना करने लगे दिन-रात? कौन-सी बेचारगी ने घेर लिया उन्हें? क्यों 32 साल के अपने किये-धरे पर उन्हें पानी फिरता नज़र आने लगा? निपट अकेले पड़ गये वह। गांधी के आख़िरी दिनों को देखने-समझने की कोशिश करती है यह किताब। इस यक़ीन के साथ कि यह देखना-समझना दरअसल अपने आपको और अपने समय को भी देखना-समझना है। एक ऐसा देखना- समझना, गांधी की मार्फत, जो शायद हमें और हमारी मापऱ्$त हमारे समय को थोड़ा बेहतर बना दे। गहरी हताशा में भी, भले ही शेखचिल्ली की ही सही, कोई आशा भी बनाए रखना चाहती है गांधी को एक असम्भव सम्भावना मानती यह किताब।
  2. Pracheen Bharat

    Pracheen Bharat

    Regular Price: Rs. 400

    Special Price Rs. 300

    25%

    प्राचीन भारत स्वर्गीय प्रो. राधाकुमुद मुखर्जी ने भारतीय इतिहास के अनेक पक्षों पर अपनी लेखनी चलाई है, लेकिन खासतौर से प्राचीन संस्कृति, प्राचीन कला और धर्म तथा राजनीतिक विचार उनके अध्ययन और लेखन के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र रहे हैं। प्रस्तुत पुस्तक में प्रो. मुखर्जी ने प्राचीन भारतीय इतिहास का परिचय सरल-सुबोध शैली में दिया है। प्रारम्भ में भारतीय इतिहास पर भूगोल के प्रभाव का विवेचन करते हुए उन्होंने इसकी मूलभूत एकता के तत्त्वों का आकलन किया है। इसमें उन तत्त्वों को उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया है जो देश की एकता को सदियों से पुष्ट करते रहे हैं और जिनके कारण ही बृहत्तर भारत का निर्माण सम्भव हो सका। यहाँ यह द्रष्टव्य है कि अपने सारे विवेचन में उन्होंने राष्ट्रीयता और जनतंत्र की नैतिक आधारशिला के रूप में अखिल भारतीय दृष्टिकोण को ही प्रमुखता दी है और उनका विवेचन सर्वत्र एक धर्मनिरपेक्ष वैज्ञानिक दृष्टि से परिपुष्ट है। प्रो. मुखर्जी ने यहाँ प्रागैतिहासिक काल से लेकर हर्षवर्धन के बाद तक के इतिहास को अपने विवेचन का विषय बनाया है और इस लम्बी अवधि के इतिहास की राजनीतिक-आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के साथ-ही-साथ उस काल की सामाजिक-सांस्कृतिक उपलब्धियों को भी संक्षिप्त और सुगठित तरीके से इस पुस्तक में समेटा है। प्रो. मुखर्जी की यह पुस्तक एक ओर अपनी प्रामाणिकता के कारण विद्वानों के लिए उपयोगी है तो दूसरी ओर भाषा-शैली की सरलता तथा रोचकता के कारण विश्वविद्यालयी छात्रों तथा इतिहास में रुचि रखनेवाले सामान्य लोगों के लिए भी उपयोगी है।
  3. Sindhu Sabhyata

    Sindhu Sabhyata

    Regular Price: Rs. 400

    Special Price Rs. 300

    25%

    ‘भारत का लोक इतिहास’ श्रृंखला की यह दूसरी पुस्तक सिन्धु सभ्यता के बारे में हैं ! इसे इस श्रृंखला की पहली पुस्तक ‘प्रागैतिहास’ की अगली कड़ी के रूप में भी पढ़ा जा सकता है ! सिन्धु सभ्यता के और विस्तृत विवरण के आलावा इसमें अन्य समकालीन और उसके बाद की संस्क्रित्यों का सर्वेक्षण भी किया गया है ! साथ ही भारत के मुख्या भाषा परिवारों के उद्भव पर विमर्श भी इसमें शामिल है ! सिन्धु घाटी और सीमावर्ती क्षेत्रों में आरंभिक कांस्य युग और उसके संस्कृतक पहलू तथा सिन्धु सभ्यता की व्यापकता, जनसँख्या, कृषि, हस्तशिल्प, व्यापर, कस्बों और शहरों की बनावट के साथ इसमें जनता, समाज और राज्यसत्ता आदि का भी प्रमाण-आधारित विश्लेषण किया गया है ! तालिकाओं, चित्रों और विस्तृत संदर्भ ग्रन्थ सूचियों के साथ यह पुस्तक श्रृंखला की अन्य पुस्तकों की ही तरह संग्रहणीय और पठनीय सिद्ध होगी !
  4. Keral Ke Hindi Sahitya Ka Itihas

    Keral Ke Hindi Sahitya Ka Itihas

    Regular Price: Rs. 850

    Special Price Rs. 638

    25%

    केरल का प्रथम हिंदी रचनाकार महाराजा स्वातितिरुनाल रामवर्मा को माना जाता है जिनका जन्म तिरुवितांकूर के राजा मार्तंड वर्मा के राजवंश में 1813 ईसवी में हुआ था ! उनकी रचनाएँ मध्यकालीन हिंदी कवियों की तरह भक्ति-प्रधान गीत थे जिनका संकलन बाद में आकर किया गया ! इसके बाद लगातार इस अहिन्दीभाषी राज्य में हिंदी में मौलिक लेखन करनेवाले रचनाकार सक्रीय रहे हैं, न सिर्फ कविता में, बल्कि कहानी, उपन्यास, निबंध व् अन्यान्य विधाओं में भी ! केरल की रचनाकार और विद्वान पी. लता ने अपनी इस पुस्तक में केरल की समूची हिंदी रचनात्मकता का सर्वांगीण इतिहास प्रस्तुत किया है, साथ ही वे उस विचार-यात्रा को भी रेखांकित करती चली हैं जो केरलीय हिंदी लेखकों, कवियों की रचनाओं के सरोकारों की प्रेरणा-शक्ति और पृष्ठभूमि रही ! मौलिक साहित्य के साथ लेखक ने इसमें अनूदित साहित्य का भी क्रमबद्ध विवरण दिया है और साथ ही व्याकरण तथा कोष आदि विषयों पर हुए लेखन को भी समाहित किया है ! प्रकाशित पुस्तकों के अलावा उन्होंने पत्र-पत्रिकाओं में छपी रचनाओं और साहित्य की भूमिका लेखन तथा सम्पादकीय लेखन जैसी शाखाओं को भी अपने विश्लेषण का आधार बनाया है और केरलीय हिंदी साहित्य के इतिहास में उनकी अवस्थिति को दर्ज किया है ! डॉ. पी. लता के प्रशंसनीय उद्यम से संभव हुई यह पुस्तक न सिर्फ छात्रों के लिए वरन उन हिंदी प्रेमियों के लिए भी अनिवार्यतः पठनीय है जो हिंदी चेतना के अखिल भारतीय विस्तार की संरचना तथा व्याप्ति को जानना चाहते हैं !
  5. Dastan Mughal Mahilaon Ki

    Dastan Mughal Mahilaon Ki

    Regular Price: Rs. 150

    Special Price Rs. 113

    25%

    मध्यकालीन इतिहास के अध्ययन, अध्यापन, शोध से 33 वर्षों के अधिक के जुडाव के कारन, इस काल के इतिहास से भली-भांति वाकिफ हैं अतः, एतिहासिक शोध के साथ लिखी गयी कुछ कहानियों के माध्यम से चयनित महिला पात्रों की भूमिका के साथ न्याय करने के प्रयास में, इस संकलन की आवश्यकता महसूस की ! इसमें प्रसिद्ध मंगोल शासक चंगेज खां की पुत्र-वधू से प्रारम्भ करके, बाबर की नानी से होते हुए, हमीदा बानो बेगम की दास्ताँ बयाँ करते हुए, हर्र्म बेगम की भूमिका को रेखांकित किया है जिसके फलस्वरूप हुमायूँ अन्ततोगत्वा भारत में प्रवेश कर पाता हैं ! अंत में अनारकली की गुत्थी को भी सुलझाने का प्रयास किया गया है !
  6. Dastan Mughal Mahilaon Ki

    Dastan Mughal Mahilaon Ki

    Regular Price: Rs. 300

    Special Price Rs. 225

    25%

    मध्यकालीन इतिहास के अध्ययन, अध्यापन, शोध से 33 वर्षों के अधिक के जुडाव के कारन, इस काल के इतिहास से भली-भांति वाकिफ हैं अतः, एतिहासिक शोध के साथ लिखी गयी कुछ कहानियों के माध्यम से चयनित महिला पात्रों की भूमिका के साथ न्याय करने के प्रयास में, इस संकलन की आवश्यकता महसूस की ! इसमें प्रसिद्ध मंगोल शासक चंगेज खां की पुत्र-वधू से प्रारम्भ करके, बाबर की नानी से होते हुए, हमीदा बानो बेगम की दास्ताँ बयाँ करते हुए, हर्र्म बेगम की भूमिका को रेखांकित किया है जिसके फलस्वरूप हुमायूँ अन्ततोगत्वा भारत में प्रवेश कर पाता हैं ! अंत में अनारकली की गुत्थी को भी सुलझाने का प्रयास किया गया है !
  7. Madhyakaleen Bharat Islami Rajya Banam Muslim Rajya

    Madhyakaleen Bharat Islami Rajya Banam Muslim Rajya

    Regular Price: Rs. 400

    Special Price Rs. 300

    25%

    प्रोफेसर जाफर रजा की पुस्तक 'मध्यकालीन भारत : इस्लामी राज्य बनाम मुस्लिम राज्य' एक महत्त्पूर्ण विषय पर एक विशिष्ट कृति है ! उन्होंने साक्ष्यों के आधार पर यह प्रदर्शित किया है कि जहाँ इस्लामी राज्य इस्लाम के आदर्शों के अनुकूल राज्य व्यवस्था का नाम है, मुस्लिम राज्य मुसलमान शासकों की राज्य प्रणाली बनाता है ! मुस्लिम राज्य साम्राज्यवादी था, जबकि इस्लामी राज्य अल्लाह को शासक मान एक प्रकार का जनतंत्र था, जिसमे धर्म और न्याय के सिद्धांत माने जाते थे ! भारत में मुस्लिम राज्य सर्वदा इस्लामी आदर्शों के अनुकूल नहीं था, वरन मुसलमान शासकों का साम्राज्यवादी मुस्लिम राज्य था, किन्तु तो भी उसे सदा धर्मांध और कट्टर नहीं मानना चाहिए ! मुस्लिम जनता का भारत में अन्य जातियों के साथ, एक बड़े देश की जनता के रूप में, सामाजिक और राजनैतिक अवदान प्रस्तुत रहा है! मुस्लिम अवदान के मूल्यांकन में शीओं और सूफियों का अवदान भी महत्त्पूर्ण रहा है ! कुल मिलकर लेखक ने इस्लाम की सही उदारतापूर्ण तस्वीर प्रस्तुत की है और मुस्लिम राज्य का विवेचनात्मक निरूपण किया है ! इसके सामाजिक-सांस्कृतिक अनुषंगों पर पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत है ! यह एक नये प्रकार की पुस्तक है, जिससे विचार्य वर्तमान समस्याओं पर बहुमूल्य प्रकाश पड़ता है ! प्रोफेसर जाफ़र रजा बधाई के पात्र हैं !
  8. Bharat Ke Shashak

    Bharat Ke Shashak

    Regular Price: Rs. 295

    Special Price Rs. 221

    25%

  9. Bharat Ke Shashak

    Bharat Ke Shashak

    Regular Price: Rs. 95

    Special Price Rs. 71

    25%

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  65. साक्षात्कार | Interview
  66. सिनेमा | Cinema
  67. सूचना का अधिकार | Information Studies
  68. स्त्री-विमर्श | Women Studies
  69. स्वास्थ्य | Health and Fitness
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