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व्याकरण | Grammer

Showing 8 books of 8 books
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  1. Vyakaran Pradeep

    Vyakaran Pradeep

    Regular Price: Rs. 100

    Special Price Rs. 75

    25%

    Out of stock

  2. Hindi Vyakaran

    Hindi Vyakaran

    Regular Price: Rs. 600

    Special Price Rs. 450

    25%

  3. Hindi Vyakaran

    Hindi Vyakaran

    Regular Price: Rs. 130

    Special Price Rs. 117

    10%

    Out of stock

  4. Navshati Hindi Vyakaran

    Navshati Hindi Vyakaran

    Regular Price: Rs. 350

    Special Price Rs. 263

    25%

    नवशती हिंदी व्याकरण हमारी भाषा की सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि इसमें भाषा को निर्मित और विकसित करने वाले देशज तत्त्वों की घोर उपेक्षा की जाती है। रचनात्मक साहित्य का एक हिस्सा भले ही ऐसा नहीं हो लेकिन, शेष लेखन पर तो अंग्रेजी भाषा का प्रभाव साफ दिखलाई पड़ता है। कहन और शैली ही नहीं, भाषा के स्वरूप का ज्ञान कराने वाला हमारा व्याकरण भी अंग्रेज़ी भाषा के व्याकरणिक ढाँचे से आवश्यकता से अधिक जकड़ा हुआ है। हालांकि, पिछले कुछ दशकों से हिन्दी की प्रकृति और प्रवृत्ति के अनुरूप व्याकरण प्रस्तुत करने के प्रयास होने लगे हैं। लेखक की इस पुस्तक को इसी प्रयास के क्रम में देखा जाना चाहिए। भाषाविद् तथा कोशकार के रूप में ख्यातिप्राप्त कर चुके बदरीनाथ कपूर ने हिन्दी की स्वाभाविक प्रकृति के अनुरूप व्याकरण की रचना करके यह प्रमाणित किया है कि हिन्दी दुनिया की अन्य विकसित भाषाओं की तुलना में अधिक व्यवस्थित होने के साथ-साथ सरल और लचीली भी है। यह एक मात्र ऐसी भाषा है जिसके अधिकतर नियम अपवादविहीन हैं। इस पुस्तक से गुजरते हुए सहज ही यह एहसास होता है कि व्याकरण नियमों का पुलिंदा भर नहीं होता, वह भाषा-भाषियों की ज्ञान-गरिमा, बुद्धि-वैभव, रचना-कौशल, संदर्भबोध और सर्जनक्षमता का भी परिचायक होता है। हिन्दी का यह सर्वथा नवीन व्याकरण सिर्फ छात्रों के लिए ही उपयोगी नहीं होगा, यह उन जिज्ञासुओं को भी राह दिखाएगा जो भाषा की आत्मा तक पहुँचना चाहते हैं।
  5. Hindi Vyakaran Mimansa

    Hindi Vyakaran Mimansa

    Regular Price: Rs. 350

    Special Price Rs. 263

    25%

    Out of stock

  6. Abhinav Hindi Vyakaran

    Abhinav Hindi Vyakaran

    Regular Price: Rs. 395

    Special Price Rs. 296

    25%

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  7. Vakya Sanrachana Aur Vishleshan : Naye Pratiman

    Vakya Sanrachana Aur Vishleshan : Naye Pratiman

    Regular Price: Rs. 300

    Special Price Rs. 225

    25%

    वाक्य संरचना और विश्लेषण: नए प्रतिमान हिंदी की प्रकृति और प्रवृत्ति को जानना-समझना डॉ. बदरीनाथ कपूर का व्यसन रहा है। बेसिक हिंदी, परिष्कृत हिंदी व्याकरण, हिंदी व्याकरण की सरल पद्धति तथा नवशती हिंदी व्याकरण आदि पुस्तकें इसी व्यसन की सूचक हैं। नवशती हिंदी व्याकरण में कुछ नई प्रस्थापनाएँ भी की गई थीं जो परम्परा से हटकर थीं। प्रस्तुत पुस्तक क्रियाओं के सम्बन्ध में डेढ़-दो वर्षों में किये गए उनके चिन्तन का सुफल परिणाम है। उनका मानना है कि क्रियापदों में ही ऐसे सूत्र निहित हैं जिनके आधार पर वाक्य की संरचना की जा सकती है। उन्होंने इन सूत्रों को ‘क्रिया-निर्देश’ की संज्ञा दी है। कुल सूत्र चालीस हैं और पाँच-पाँच सूत्रों के इनके आठ सर्ग हैं। इन्हीं के आधार पर इस पुस्तक में हिंदी वाक्यों की - विशेषतः सरल वाक्यों की - संरचना करने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक में वाक्य-संरचना और विश्लेषण दोनों साथ-साथ दिये गए हैं जिससे स्पष्ट हो कि क्रिया- निर्देशों और नवशती हिंदी व्याकरण की स्थापनाओं (दोनों) का उद्देश्य एक है। हिंदी वाक्य-संरचना के नये प्रतिमान प्रस्थापित करने वाली डॉ. बदरीनाथ कपूर की यह महत्त्वपूर्ण पुस्तक हिंदी भाषा की सूत्रबद्धता को स्थापित करती है और सिद्ध करती है कि हिंदी एक सुचिंतित और सुनियोजित भाषा है। हिंदी भाषा की अस्मिता और गरिमा की वृद्धि करनेवाली इस महत्त्वपूर्ण कृति का संयोजन वैज्ञानिक और गणितीय पद्धति पर हुआ है। छात्रों-अध्येताओं के लिए समान रूप से उपयोगी।

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  8. Hindi Bhasha Ka Vrihat Eitihasik Vyakaran

    Hindi Bhasha Ka Vrihat Eitihasik Vyakaran

    Regular Price: Rs. 750

    Special Price Rs. 563

    25%

    हिन्दी भाषा का वृहत ऐतिहासिक व्याकरण आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी साहित्येतिहास के उद्भट विद्वान थे, चार चर्चित उपन्यासों और अनेक निबन्धों की रचना करके उन्होंने स्वयं को एक संवेदनशील रचनाकार के रूप में भी सिद्ध किया, इसके साथ ही भाषा-व्यवहार और विज्ञान पर भी उन्होंने बराबर कार्य किया जिसका प्रमाण यह ग्रन्थ है। आचार्य द्विवेदी का अभी तक अप्रकाशित यह ग्रन्थ व्याकरण पर उनकी एक दीर्घ कार्य-योजना का हिस्सा है। उनकी यह अध्ययन-परियोजना चार खंडों में पूरी हुई थी, लेकिन दुर्भाग्यवश इस खंड के अलावा बाकी तीन खंड फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं जिनकी खोज जारी है। इस ग्रन्थ में आचार्य द्विवेदी ने संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण की सोदाहरण व्याख्या करते हुए उनका वर्गीकरण किया है। विभिन्न कालखंडों के कवियों-रचनाकारों द्वारा किए गए प्रयोगों को उद्धृत करते हुए उन्होंने इस ग्रन्थ में सम्बन्धित विषय को अत्यन्त ग्राह्य शैली में प्रस्तुत किया है। शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिए एक आवश्यक ग्रन्थ।

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