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पर्यावरण | Environment

Showing 10 books of 24 books
Banyan Tree Books Lokbharti Prakashan Radhakrishna Prakashan Rajkamal Prakashan

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  1. Prithvi Manthan

    Prithvi Manthan

    Regular Price: Rs. 499

    Special Price Rs. 374

    25%

    पृथ्वी मंथन यह एक बेहतरीन किताब है...कक्षा में मैं इसका प्रयोग किसी और पुस्तक से ज़्यादा करता हूँ। —पी. साईनाथ, पत्रकार व लेखक प्रचार-हमला को चीरती हुई यह किताब बताती है कि आज क्या हो रहा है। —अमिताव घोष, लेखक यह आज के विरोधी-धाराओं का एक महत्त्वपूर्ण वृत्तान्त है...इस पक्ष को सुनना और समझना ज़रूरी है। —अरुणा राय, समाजकर्मी वैश्वीकरण के विशाल पुस्तक-संग्रह में यह किताब बौद्धिक साहस और ईमान का एक कीर्तिमान है जो बेहतर दुनिया के लिए रास्ता दिखाती है। —अमित भादुड़ी, अर्थशास्त्री आज अगर गाँधी जी जि़न्दा होते और 'हिन्द स्वराज' की रचना करते, तो उन्हें लगभग उन्हीं सवालों से जूझना पड़ता जो इस किताब में हैं। —गणेश देवी, लेखक और भाषाविद् यह किताब दर्शाती है कि इस वैश्विक युग में हमारी तथाकथित स्वेच्छा वस्तुत: कितनी पराधीन है...आज की दुनिया से चिन्तित किसी भी इनसान के लिए यह पुस्तक अनिवार्य है। —मल्लिका साराभाई, नृत्यांगना और संस्कृतिकर्मी आज के वैश्विक युग की तमाम तब्दीलियों के परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण संश्लेषण है...साथ ही इस किताब में एक वैकल्पिक दुनिया की कल्पना की गई है जिस पर गम्भीरता से सोचने और बहस करने की ज़रूरत है। —माधव गाडगिल, पर्यावरणशास्त्री यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और असरदार किताब है...लेखक जो व्यापक प्रमाण पेश करता है उसका हमें सामना करना होगा। —हर्ष मंदर, समाजकर्मी
  2. Vanodeya

    Vanodeya

    Regular Price: Rs. 350

    Special Price Rs. 263

    25%

    वनोदेय वनसंपदा प्रकृति का अनोखा उपहार है ! वर्षा-पानी, कृषि, पशुपालन आदि अन्य अद्योग भी जंगलों के साथ अभिन्न रूप से जुड़े हैं ! प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कई प्रकार के लाभ जंगलों से हमें प्राप्त होते हैं ! भारतीय अध्यात्मिक जीवन-दर्शन एवं चिंतन के पवित्र तथा उदात्त केंद्र मने जाते हैं ये ! इन्हीं सब विशेषताओं के मद्देनजर अनादि काल से वनांचल बहुमूल्य धरोहर मने जाते रहे हैं ! किन्तु विगत कुछेक दर्शकों से हमने इस धरोहर की रक्षा की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया और अभी भी हम इस ओर अनदेखी ही कर रहे हैं ! हम जंगलों की निरंतर नोच-खसोट और हत्या इतनी निर्ममता से कर रहे है कि इससे हमारी सहृदयता पर बड़े-बड़े प्रश्नचिन्ह लगते ही जा रहे हैं ! प्रकृति के प्रति यह कृतघ्नता अंततः समूची मानवता के विनाश का कारन बन सकती है ! दुनिया पर मंडरा रहे इन्हीं खतरों के बादलों की ओर ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास इस पुस्तक के जरिए किया गया है !
  3. Mahagatha Vrikshon Ki

    Mahagatha Vrikshon Ki

    Regular Price: Rs. 200

    Special Price Rs. 150

    25%

  4. Griha Vatika

    Griha Vatika

    Regular Price: Rs. 250

    Special Price Rs. 188

    25%

  5. Ped Paudhe Aur Jeev Jantu

    Ped Paudhe Aur Jeev Jantu

    Regular Price: Rs. 200

    Special Price Rs. 150

    25%

  6. Vayumandaleeya Pradooshan

    Vayumandaleeya Pradooshan

    Regular Price: Rs. 200

    Special Price Rs. 150

    25%

    वायुमंडलीय प्रदूषण वायुमंडलीय प्रदूषण आज जिस तरह सघन होता जा रहा है, उससे पृथ्वी, प्रकृति और संपूर्ण जीवन-जगत को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसके मूल कारणों में हैं - तीव्र होता जा रहा शहरीकरण, अनियंत्रित औद्योगिक विकास और बढ़ती हुई आबादी। डॉ. हरिनारायण श्रीवास्तव की यह पुस्तक पर्यावरण अथवा वायुमंडल-प्रदूषण की गंभीर समस्या का वैज्ञानिक अध्ययन है। अपने अध्ययन-क्षेत्र के विशिष्ट विद्वान डॉ. श्रीवास्तव ने पूरी पुस्तक को आठ अध्यायों में बाँटा है। पहले अध्याय में वायुमंडल, जलवायु और वायुविलय संबंधी जानकारी है। दूसरे में मौसम और प्रदूषण-मापक आधुनिक उपकरणों का विवरण है। तीसरे, चौथे और पाँचवें अध्याय में वायु, जल तथा ध्वनि-प्रदूषण के प्रभाव, उनके नियंत्रण आदि की चर्चा है। छठे में क्लोरोफ्लूरो कार्बन के ओजोन परत पर पड़ रहे दुष्प्रभाव और उसकी प्रक्रिया को समझाया गया है। सातवें अध्याय में अम्ल-वर्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है, तथा आठवें में तापमान, वर्षा, पवनगति, सौर-विकिरण एवं कृषि आदि पर निरंतर बढ़ती जा रही कार्बन डाइऑक्साइड एवं विरल गैसों के संभावित दुष्प्रभावों का विवेचन किया गया है। परिशिष्ट में दिए गए कुछ महत्त्वपूर्ण अध्ययन-निष्कर्षों तथा प्रत्येक अध्याय में यथास्थान शामिल विभिन्न तालिकाओं और रेखाचित्रों ने इस पुस्तक की उपयोगिता में और बढ़ोतरी की है। कहना न होगा कि वर्तमान सभ्यता पर मँडराते सर्वाधिक घातक खतरे के प्रति आगाह करनेवाली यह कृति एक मूल्यवान वैज्ञानिक अध्ययन है।
  7. Janwar Aur Unka Bhojan

    Janwar Aur Unka Bhojan

    Regular Price: Rs. 200

    Special Price Rs. 150

    25%

  8. Manushya Aur Paryavaran

    Manushya Aur Paryavaran

    Regular Price: Rs. 400

    Special Price Rs. 300

    25%

    मनुष्य और पर्यावरण विगत दशकों में पारिस्थितिकी और उससे जुड़े मसलों के प्रति विशेष रुचि दिखाई पड़ी है, खास तौर पर जलवायु-परिवर्तन को लेकर होनेवाली बहसों के सन्दर्भ में इस तरफ सुधीजन का ज्यादा ध्यान गया है। लेकिन पारिस्थितिकी का विमर्श सिर्फ जलवायु तक सीमित नहीं है। इसमें जीव-जन्तुओं तथा पेड़-पौधों के साथ मनुष्य के रिश्तों के अलावा मनुष्य जाति के सम्मुख प्रकृति द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों का अध्ययन भी शामिल होता है। इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य के साथ इस पुस्तक में पारिस्थितिकी के इतिहास को देखा-समझा गया है। 'भारत का लोक इतिहास’ परियोजना के तहत प्रकाशित यह पुस्तक भी इस शृंखला की अन्य कड़ियों की तरह गहन अध्ययन और प्रामाणिक सामग्री पर आधारित है। मूल स्रोतों के उद्धरणों तथा पारिस्थितिकी, पर्यावरण विज्ञान, वन विज्ञान तथा प्राकृतिक इतिहास पर विशेष टिप्पणियों से समृद्ध इस पुस्तक में विषय से सम्बन्धित अन्य उपयोगी ग्रन्थों का उल्लेख भी किया गया है जिससे पाठक और अधिक लाभान्वित होंगे। सूचनाओं की सटीकता को बरकरार रखते हुए, पुस्तक को अतिरिक्त तकनीकी विवरणों से मुक्त रखा गया है ताकि इतिहास के छात्रों के अलावा यह सामान्य पाठकों के लिए भी रुचिकर सिद्ध हो।
  9. Uttrakhand Ki Lok Evam  Prayavaran Gathayen

    Uttrakhand Ki Lok Evam Prayavaran Gathayen

    Regular Price: Rs. 400

    Special Price Rs. 300

    25%

    'उत्तराखंड की लोक एवं पर्यावरण गाथाएँ' एक अनूठी पुस्तक है! प्रभात कुमार उप्रेती ने सहज बोध, अनुसन्धान और कल्पना के संयोग से इन कथाओं को आकार दिया है! संकलन की अधिकांश गाथाएँ य कथाएं लोक जीवन में व्याप्त अक्षय निधि की दें हैं! लोककथाओं की विशेषता है कि वे स्थान और समय के बीच विचित्र रीति से संचरण करती हैं! कई बार भाषा, घटना और पत्रों में अनायास संशोधन होता रहता है! अक्षुण्ण रहता है तो इन कथाओं का मंतव्य! प्रभात कुमार उप्रेती ने उत्तराखंड के कण-कण से इन कथाओं का संचयन किया है! मनोरजन, नीति, रहस्य, रोमांच, रोचकता अरु जीवनबोध का तत्त्व समेटे हुए ये कथाएँ पाठक के man को गहरे से प्रभावित करती हैं! विशेष यह है कि हम चाहें तो समकालीन जीवन से जोड़कर भी इनका नया भाष्य कर सकते हैं! इनमें पूरण, प्रकृति और परंपरा की आवाजाही सहज भाव से होती है! लोक कथाओं के साथ पर्यावण कथाएं हैं, जो लेखक की रचनाशीलता और वैचारिक पक्षधरता को रेखांकित करती हैं! समग्रतः मनोरंजन और जीवनादर्शों से युक्त यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रभावित करेगी! उत्तराखंड की आंचलिक उपस्थिति (भाषा, परिवेश और कहाँ के रूप में) इसे और विशिष्ट बनती है!
  10. Bharat Ka Rashtriya Vriksh Aur Rajyo Ke Rajya Vriksh

    Bharat Ka Rashtriya Vriksh Aur Rajyo Ke Rajya Vriksh

    Regular Price: Rs. 700

    Special Price Rs. 525

    25%

    भारत का राष्ट्रीय वृक्ष और राज्यों के राज्य वृक्ष एक अनूठी पुस्तक है। इसका उद्देश्य है पाठकों को अपने पर्यावरण के प्रति सचेत व सहृदय बनाना। इस पुस्तक में भारत के राष्ट्रीय वृक्ष सहित 25 राज्यों और 2 केन्द्रशासित प्रदेशों के राज्य वृक्षों का परिचय दिया गया है। छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जिन्होंने अभी तक अपने राज्य वृक्ष घोषित नहीं किए हैं। इसके साथ ही चंडीगढ़, दादर नगर हवेली, दमन एवं दीव और पांडिचेरी के भी राज्य वृक्ष नहीं हैं। केन्द्रशासित प्रदेशों में केवल लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार ने अपने राज्य वृक्ष घोषित किए हैं। भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद है। यह उड़ीसा का राज्य वृक्ष भी है। लगभग ऐसी ही स्थिति पीपल और हुलुंग की है। पीपल को बिहार और हरियाणा दोनों ने अपना राज्य वृक्ष घोषित किया है। हुलुंग विश्व भर में होलांग के नाम से प्रसिद्ध है। हुलुंग को अरुणाचल प्रदेश और असम दोनों ने अपना राज्य वृक्ष माना है। प्रत्येक वृक्ष के परिचय में वृक्ष का हिन्दी नाम, अंग्रेजी नाम और वैज्ञानिक नाम दिया गया है। पुस्तक का उद्देश्य वृक्षों से सम्बन्धित भ्रामक धारणाओं का खंडन करते हुए वैज्ञानिक जानकारियाँ प्रदान करना और इनके महत्त्व एवं उपयोग से परिचित कराना है। समाजशास्त्री और पर्यावरणविद् डॉ. परशुराम शुक्ल ने उक्त उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक में वृक्षों के बारे में विस्तार से जानकारियाँ दी हैं। ये रोचक और ज्ञानवद्र्धक हैं। हिन्दी में अपने विषय पर यह अकेली पुस्तक है।

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