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शिक्षा | Education

Showing 10 books of 16 books
Banyan Tree Books Lokbharti Prakashan Radhakrishna Prakashan Rajkamal Prakashan

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  1. Janane Ki Baatein (Vol. 1-11)

    Janane Ki Baatein (Vol. 1-11)

    Regular Price: Rs. 1,650

    Special Price Rs. 1,238

    25%

    राजा राममोहन राय से लेकर उत्पलेन्दु चक्रवर्ती तक बंगाल में निरन्तर नये विचारों के प्रसार के मा/यम से जिन महापुरुषों ने नवजागरण की धारा को मजबूत किया है, उनमें एक देवीप्रसाद चट्टोपा/याय भी हैं । भारतीय दर्शन की भौतिकवादी धारा को रेखांकित करने के लिए इन्हें पूरी दुनिया में आदर के साथ याद किया जाता है । देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने एक तरफ भौतिकवाद को मज़बूत करने के लिए लोकायत जैसी पुस्तक लिखी तो दूसरी तरफ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों में फँसे भारतीय समाज के बच्चों में समय, समाज और प्रकृति को देखने–परखने की वैज्ञानिकी समझ तथा ज्ञान के विकास के लिए ग्यारह खंडों में इस महत्त्वपूर्ण पुस्तकमाला का सम्पादन किया, जो किसी बाल विश्वकोश से कम नहीं है । इस श्रृंखला की पुस्तकें केवल बच्चों के ज्ञान का ही विस्तार नहीं करती हैं, बल्कि उन्हें बिल्कुल नई समझ और संसार को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करती हैं । पुस्तकमाला के पहले भाग में लेखक ने प्रकृति से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ संकलित की हैं । इसमें आसमान, सौरमंडल और पृथ्वी के बनने तथा वनस्पतियों और जीवों की उत्पत्ति के वैज्ञानिक कारणों को बहुत ही रोचक शैली तथा सहज भाषा में समझाया गया है ।

    Out of stock

  2. Abhivanchiton Ka Shikshadhikar

    Abhivanchiton Ka Shikshadhikar

    Regular Price: Rs. 350

    Special Price Rs. 263

    25%

    अभिवंचितों का शिक्षाधिकार - एक सृजनवादी प्रयोग आधुनिक शिक्षा व्यवस्था केवल उच्च और मध्यम वर्गों की सेवा करती है। निम्न-मध्य और निम्न वर्गों के विद्यार्थी इसमें अपनी वास्तविकताओं के बरक्स खड़ी दुनियाओं के अनुकरण से ज्यादा कुछ हासिल नहीं करते। कुछ प्रयास इस दिशा में जरूर हुए हैं कि वंचित और हाशिए पर पड़े लोगों तक शिक्षा पहुँचे, लेकिन वह किस रूप में पहुँच पाई है, और कितनी, इसका कोई स्पष्ट आकलन हमारे सामने नहीं है। एक सरोकारवान शोध अध्ययन पर आधारित यह पुस्तक कुछ ऐसे पैमानों को गढ़ने की कोशिश करती है जिनके द्वारा हम अभिवंचित समुदायों तक पहुँची शिक्षा की गुणवत्ता, स्वरूप और मात्रा का अंदाजा लगा सकते हैं। साथ ही शिक्षा के अपने अधिकार को हासिल करने में क्या कुछ करना आवश्यक है, इसका भी उल्लेख किया गया है। शोध के आधार पर मिले परिणामों के विश्लेषण से शैक्षिक परिदृश्य में सकारात्मक परिवर्तन हेतु एक व्यावहारिक मॉडल के निरूपण का प्रयास भी यह पुस्तक करती है। यह पुस्तक इस बात को भी विशेष रूप से रेखांकित करती है कि अभिवंचित तबकों के बच्चे भी इस देश की उतनी ही मूल्यवान पूँजी हैं जितने सम्पन्न और खाते-पीते लोगों की सन्तानें। जरूरत है बस निष्ठा और ईमानदारी के साथ उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने, और उससे भी ज्यादा मुख्यधारा में इनके लिए स्थान बनाने की।
  3. School Ki Hindi

    School Ki Hindi

    Regular Price: Rs. 200

    Special Price Rs. 150

    25%

    स्कूल की हिन्दी कृष्ण कुमार का यह नया निबन्ध-चयन उनके शैक्षिक लेखन को एक वृहत्तर सांस्कृतिक सन्दर्भ देता है। बच्चों के लालन-पालन और उनकी शिक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल यहाँ बीसवीं सदी के अन्तिम वर्षों में बदलती- बनती नागरिक संस्कृति की परिधि में की गई है। खिलौनों और पाठ्यपुस्तकों की भाषा से लेकर धार्मिक अलगाव- वाद की राजनीति और सामाजिक विषमता तक एक लम्बी प्रश्न-शृंखला है, जिसमें कृष्ण कुमार अपनी सुपरिचित चिन्ताएँ पिरोते हैं। इन चिन्ताओं में साहित्य की परख, स्त्री की असुरक्षा और भाषा के भविष्य जैसे विविध प्रसंग शामिल हैं। अपनी व्यंजनापरक शैली और चीज़ों को रुककर देखने की ज़िद से कृष्ण कुमार ने एक बड़ा पाठक-वृत्त बनाया है। अध्यापन और लेखन के बीच कृष्ण कुमार एक व्यक्तिगत पुल बनाने में सफल हुए हैं। यह पुल उनके शैक्षिक सरोकारों को खोजी यात्राओं पर ले जाता है और उनके पाठकों को स्कूल की चारदीवारी और बच्चों के मनोजगत में प्रवेश कराता है।
  4. Raaj Samaj Aur Shiksha

    Raaj Samaj Aur Shiksha

    Regular Price: Rs. 400

    Special Price Rs. 300

    25%

    शिक्षा की बहसें प्रायः सरकारी नीतिपत्रों में दिए गए वायदों, घिसे-पीटे आदर्श वाक्यों या फिर प्राचीन व्यवस्था के मिथकों के इर्द-गिर्द घुमती हैं ! स्कूल और कॉलेजों की दैनिक चर्चा हो या शिक्षाशास्त्र की पाठ्य पुस्तकें-दोनों ही बच्चे के जीवित संसार और समाज के व्यापक संघर्षों से बहुत दूर जा पड़ी हैं ! इस पुस्तक ने शिक्षा की बहसों को एक नई शब्दावली ही नहीं, एक नई अर्थवत्ता भी दी है ! कोई आश्चर्य नहीं कि यह पुस्तक उमस के बीच तजि हवा के झोंके का पर्याय बन सकने की क्षमता रखती है ! शिक्षा की सच्चाई को यह कृति राज्य-व्यवस्था और सामाजिक जीवन की जटिल बुनावट के बीच ढूंढती है ! इसे पढ़ते हुए हम बच्चों के प्रति अपनी स्वाभाविक चिंता को एक राजनैतिक आधार और वैज्ञानिक अभिव्यक्ति पाते हुए देखते हैं ! शिक्षा को कृष्ण कुमार ने बहुत व्यपक अर्थ में लिया है, जिसमें बच्चों के लालन-पालन से लेकर उन्हें सामाजिक मुल्योबोध देनेवाली अनेक सूक्ष्म प्रक्रियाएँ शामिल हैं ! जाहिर है, इस पुस्तक का पाठक वर्ग शिक्षा के नीतिकारों, प्रशिक्षको और छात्रों तक सीमित नहीं है ! उसमें ऐसे सभी माता-पिता भी शामिल हैं जो अपनी संतान के भविष्य को समाज की संरचना और राजनीती के चरित्र से अलग नहीं मानते !
  5. Shanti ka samar

    Shanti ka samar

    Regular Price: Rs. 200

    Special Price Rs. 150

    25%

    शांति का समर भारत और पाकिस्तान के संबंधों में भावनाओं, विचारों और सन्देहों का एक बड़ा सा जंजाल आज“ादी के समय से फैला हुआ है, जो समय–समय पर टकराव की स्थिति पैदा कर देता है । इस पुस्तक में इस जंजाल की छानबीन गहरे धीरज और इस आशा के साथ की गई है कि दोनों देश अपनी–अपनी राष्ट्रीय अस्मिताओं को बनाये रखते हुए शांति के एक नये दक्षिण एशियाई संदर्भ की रचना कर सकते हैं । महात्मा गाँधी की हत्या से लेकर कश्मीर–समस्या और विश्व स्तर पर उभरे अस्मिताओं के संघर्ष तक अनेक विषयों की पड़ताल करते हुए लेखक ने कई महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार किया है % राष्ट्रपिता की हत्या क्यों हुई ? विभाजन के इतिहास को अनुभूति के स्तर पर आज किस तरह देखा जाये ? गाँधी और जिन्ना की विरासतें आज तक हमें किस तरह प्रभावित करती रही हैं ? आदि प्रश्नों की मदद से यह पुस्तक हमें विचारोत्तेजक समाधि की अवस्था में ले जाती है । इसे पढ़ते हुए हम शांति की संभावना को लेकर एक नई तरह का तर्क रचने की प्रेरणा पाते हैं जिसका आधार बीते हुए कल की रूमानी यादों में न हो । दक्षिण एशिया में सामूहिक शांति के पक्ष में सहमति बनाने के सिलसिले में यह पुस्तक बच्चों और युवाओं की शिक्षा के अलावा मीडिया की भूमिका पर भी रोशनी डालती है ।

    Out of stock

  6. Sakshatkar : Kaise Hon Taiyar

    Sakshatkar : Kaise Hon Taiyar

    Regular Price: Rs. 95

    Special Price Rs. 71

    25%

    Out of stock

  7. Sapnon ka Ped

    Sapnon ka Ped

    Regular Price: Rs. 300

    Special Price Rs. 225

    25%

    सपनों का पेड़ कई बार कुछ चीजें, हमारे जीवन में बिना कोई प्रश्न खड़ा किए, पूरी मासूमियत और स्वाभाविकता से आकर शामिल हो जाती हैं, हम देख भी नहीं पाते कि उन्होंने हमारे साथ क्या किया, कृष्ण कुमार अक्सर इन्हीं चीजों की आवाजाही को पकड़ते हैं, और एक ऐसी सुथरी, संयत, पारदर्शी और अभिव्यक्तिशील भाषा में उन्हें अंकित करते हैं कि फौरन ही उनसे सहमत न हो पाने की कोई गुंजाइश नहीं रहती । कृष्ण कुमार विख्यात शिक्षाशास्त्री और समकालीन भारतीय समाज के ‘कैलाइडोस्कोप’ को गहरी और विश्वसनीय संलग्नता, और उतनी ही वस्तुनिष्ठता के साथ देखनेवाले गद्यकार हैं । इस पुस्तक में सम्मिलित हर आलेख उनकी चिन्ता और सरोकार की इन विशेषताओं का साक्षी है । प्रकृति, नगर, राज्यसत्ता और व्यापार जगत से लेकर उनकी दृष्टि तितलियों, खिलौनों, साइकिलों, कारों और तरह–तरह के काम करते लोगों तक जाती है । और हर जगह जहाँ वे देखते हैं, चीजें अपनी सम्पृक्ति और अलगाव, दोनों के साथ हमें पूरी–पूरी दिखाई देती हैं । उनका बहुपरतीय सत्य, उनके होने के सी/ो और टेढ़े अभिप्राय, सब हमारे सामने खुल जाते हैं । यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अनिवार्य है जो अपने सामाजिक होने को एक दिशा देना चाहते हैं, और उनके लिए भी जिन्होंने काफी समय से किसी उम्दा गद्य को नहीं पढ़ा ।
  8. Mujhe Aise Padhao

    Mujhe Aise Padhao

    Regular Price: Rs. 195

    Special Price Rs. 146

    25%

    मुझे ऐसे पढ़ाओ सीखने का शिक्षा में और शिक्षा का मानव के गुणात्मक विकास में अहम योगदान है। गुणात्मक शिक्षण के लिए ‘उत्पादक शैक्षिक वातावरण’ पूर्वापेक्षित है। यह पुस्तक ‘उत्पादक शैक्षिक वातावरण के निर्माण’ में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सीखने-सिखाने से जुडे़ मार्गदर्शकों की सहायता करने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। ‘उत्पादक शैक्षिक वातावरण’ शिक्षक, छात्र तथा सीखने के परिवेश के बीच आवश्यक तालमेल के बिना असंभव है। इस पुस्तक में सीखने तथा सिखाने के उन व्यावहारिक अनछुए पहलुओं को सम्मिलित किया गया है, जो विद्यार्थियों में सीखने की ललक पैदा करने, विषय की ग्राह्यता बढ़ाने के अतिरिक्त शिक्षकों की अपने पेशे से रुचि एवं संतुष्टि बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। सम्पूर्ण पुस्तक को चार भागों में बाँटकर इस उद्देश्य को पूरा किया गया है। पहले भाग में जहाँ छात्रों की पहचान के लिए उनमें पाई जानेवाली मनोवैज्ञानिक, सामाजिक तथा आर्थिक भिन्नताओं, मसलनदृपरिपक्वता, बुद्धि, लिंग, सामाजिक-आर्थिक स्तर इत्यादि पर प्रकाश डाला गया है, वहीं दूसरे भाग में उत्पादक शैक्षिक वातावरण के निर्माण के लिए सीखने में शिक्षकों की भूमिका के महत्त्व को रेखांकित किया गया है। पुस्तक के तीसरे भाग में सीखने के परिवेश को शिक्षण के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक पहलुओं पर चर्चा की गई है। चौथे और अन्तिम भाग में सीखने की प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए मापन और मूल्यांकन तथा सीखने में पिछड़नेवाले विद्याथियों की काउन्सिलिंग की प्रक्रिया से अवगत कराया गया है। किसी भी शिक्षक के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने जीवनकाल में ज्यादा से ज्यादा बच्चों के मन में घनात्मक परिवर्तन लाना है। इस पुस्तक के माध्यम से हमारा यह प्रयास है कि शिक्षक तथा अभिभावक अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित कर उनके सच्चे मार्गदर्शक बन पाएँ।
  9. Mujhe Aise Padhao

    Mujhe Aise Padhao

    Regular Price: Rs. 500

    Special Price Rs. 375

    25%

    मुझे ऐसे पढ़ाओ सीखने का शिक्षा में और शिक्षा का मानव के गुणात्मक विकास में अहम योगदान है। गुणात्मक शिक्षण के लिए ‘उत्पादक शैक्षिक वातावरण’ पूर्वापेक्षित है। यह पुस्तक ‘उत्पादक शैक्षिक वातावरण के निर्माण’ में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सीखने-सिखाने से जुडे़ मार्गदर्शकों की सहायता करने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। ‘उत्पादक शैक्षिक वातावरण’ शिक्षक, छात्र तथा सीखने के परिवेश के बीच आवश्यक तालमेल के बिना असंभव है। इस पुस्तक में सीखने तथा सिखाने के उन व्यावहारिक अनछुए पहलुओं को सम्मिलित किया गया है, जो विद्यार्थियों में सीखने की ललक पैदा करने, विषय की ग्राह्यता बढ़ाने के अतिरिक्त शिक्षकों की अपने पेशे से रुचि एवं संतुष्टि बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। सम्पूर्ण पुस्तक को चार भागों में बाँटकर इस उद्देश्य को पूरा किया गया है। पहले भाग में जहाँ छात्रों की पहचान के लिए उनमें पाई जानेवाली मनोवैज्ञानिक, सामाजिक तथा आर्थिक भिन्नताओं, मसलनदृपरिपक्वता, बुद्धि, लिंग, सामाजिक-आर्थिक स्तर इत्यादि पर प्रकाश डाला गया है, वहीं दूसरे भाग में उत्पादक शैक्षिक वातावरण के निर्माण के लिए सीखने में शिक्षकों की भूमिका के महत्त्व को रेखांकित किया गया है। पुस्तक के तीसरे भाग में सीखने के परिवेश को शिक्षण के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक पहलुओं पर चर्चा की गई है। चौथे और अन्तिम भाग में सीखने की प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए मापन और मूल्यांकन तथा सीखने में पिछड़नेवाले विद्याथियों की काउन्सिलिंग की प्रक्रिया से अवगत कराया गया है। किसी भी शिक्षक के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने जीवनकाल में ज्यादा से ज्यादा बच्चों के मन में घनात्मक परिवर्तन लाना है। इस पुस्तक के माध्यम से हमारा यह प्रयास है कि शिक्षक तथा अभिभावक अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित कर उनके सच्चे मार्गदर्शक बन पाएँ।

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