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Chhitvan Ki Chhanh

Chhitvan Ki Chhanh

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  • Pages: 123
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789352211937
  •  
    छितवन की छाँह छितवन की छाँह हमें मिलती है मधुमास की नयी सन्ध्या में और वह फिर मिलती है कुआर की उमसी दुपहरी में। वह यौवन के चढ़ाव और उतार का मापदंड है। चढ़ते समय चढ़ाई के रंग और उमंग में और उतरते समय उतरने की खुमारी में लोग इसे भर आँख निहार नहीं पाते और जान नहीं पाते कि यह क्या है।

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    Vidya Nivas Mishra

    डॉ. विद्यानिवास मिश्र

    जन्म: मकर संक्रांति, 1982 वि., गाँव पकड़डीहा, जिला गोरखपुर। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में, माध्यमिक शिक्षा गोरखपुर में, संस्कृत की पारंपरिक शिक्षा घर पर और वाराणसी में। 1945 में प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए.। हिंदी साहित्य सम्मेलन में स्वर्गीय राहुल की छाया में कोश-कार्य, फिर पं. श्रीनारायण चतुर्वेदी की प्रेरणा से आकाशवाणी में कोश-कार्य, विंध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूचना विभागों में सेवा, गोरखपुर विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और आगरा विश्वविद्यालयों में क्रमशः अध्यापन संस्कृत और भाषा-विज्ञान का। 1960-61 और 1967-68 में कैलीफोर्निया और वाशिंगटन विश्वविद्यालयों में अतिथि अध्यापक। केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक, काशी विद्यापीठ तथा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति-पद से निवृत्त होने के बाद कुछ वर्षों के लिए नवभारत टाइम्स, नई दिल्ली के संपादक भी रहे।

    कृति संदर्भ: शेफाली झर रही है, गाँव का मन, संचारिणी, लागौ रंग हरी, भ्रमरानंद के पत्र, अंगद की नियति, छितवन की छाँह, कदम की फूली डाल, तुम चंदन हम पानी, आँगन का पंछी और बनजारा मन, मैंने सिल पहुँचाई, साहित्य की चेतना, बसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं, मेरे राम का मुकुट भीग रहाहै, परंपरा बंधन नहीं, कँटीले तारों के आर-पार, कौनतू फुलवा बीननि हारी, अस्मिता के लिए, देश, धर्म और साहित्य (निबंध-संग्रह); दि डिस्क्रिप्टिव टेकनीक ऑफ पाणिनि, रीतिविज्ञान, भारतीय भाषा-दर्शन की पीठिका, हिंदी की शब्द-संपदा (शोध); पानी की पुकार (कविता-संग्रह); रसखान रचनावली, रहीम ग्रंथावली, देव की दीपशिखा, आलम ग्रंथावली, नई कविता की मुक्तधारा (सम्पादित)।

    निधन: 14 फरवरी, 2005

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
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