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Chhinnmasta

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  • Pages: 192p
  • Year: 2016, 9th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126702534
  •  
    छिन्नमस्ता प्रभा खेतान स्त्री-जीवन की विडम्बनाओं, उसके शोषण, उत्पीड़न और संघर्षों का जीवन्त दस्तावेज़ है प्रभा खेतान का उपन्यास - ‘छिन्नमस्ता’। उपन्यास की केन्द्रीय पात्र प्रिया का सृजन करते हुए प्रभा खेतान ने ख़ूबी के साथ यह स्थापित किया है कि स्त्री चाहे तो सम्पूर्ण विषम परिस्थितियों और विडम्बनाओं को लाँघकर अपने लिए ऐसा मार्ग तलाश सकती है जो उसे सफलता के शीर्ष तक ले जाए। यह उपन्यास शोषित महिलाओं के लिए प्रेरक है। इसमें पीड़ित स्त्रियों को सम्बल प्रदान करने की क्षमता है। ‘छिन्नमस्ता’ युगों से प्रताड़ित नारी के शोषण के विविध आयामों को परत-दर-परत उघाड़नेवाला उपन्यास है जो यह रेखांकित करता है कि घर की सुरक्षित दीवारों के पीछे भी नायिका प्रिया की अस्मत लूट ली जाती है। किन्तु औरत की उत्कट जिजीविषा का परिचय भी ‘छिन्नमस्ता’ में निहित हैं जिसमें प्रभा जैसी शोषित नारी भी अन्ततः अपनी पहचान अर्जित करती है और अपनी सम्पूर्ण संवेदनशीलता के साथ जीती-जागती हुई अपना स्वतन्त्र व्यवसाय स्थापित करती है। घर के सीमित दायरे से मुक्त हो अपने सपनों को सुदूर क्षितिज तक विस्तृत का संघर्ष-स्वप्न है - ‘छिन्नमस्ता’।

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    Prabha Khetan

    प्रभा खेतान
    जन्म : 1 नवम्बर, 1942
    शिक्षा : एम–ए– पी–एच–डी– (दर्शनशास्त्र)
    प्रकाशित कृतियाँ
    उपन्यास : आओ पेपे घर चलें !, छिन्नमस्ता, पीली आँधी, अग्निसंभवा, तालाबंदी, अपने–अपने चेहरे ।
    कविता : अपरिचित उजाले, सीढ़ियाँ चढ़ती हुई मैं, एक और आकाश की खोज में, कृष्ण धर्मा मैं, हुस्न बानो और अन्य कविताएँ, अहल्या ।
    चिंतन : उपनिवेश में स्त्री सार्त्र का अस्तित्ववाद, शब्दों का मसीहा : सार्त्र, अल्बेयर कामू : वह पहला आदमी ।
    अनुवाद : साँकलों में कैद कुछ क्षितिज (कुछ दक्षिण अफ्रीकी कविताएँ), स्त्री : उपेक्षिता (सीमोन द बोउवार की विश्व–प्रसिद्ध कृति ‘द सेकंड सेक्स’) ।
    संपादन : एक और पहचान, ‘हंस’ का स्त्री विशेषांक भूमंडलीकरण : पितृसत्ता के नये रूप ।
    निधन : 20 सितम्बर, 2008 ।

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
    • Funda An Imprint of Radhakrishna
    • Korak An Imprint of Radhakrishna

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